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ऐसे हैं पीएम मोदी के सुरक्षा सलाहकार

Sun, 01 Jun 2014 11:17 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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मंत्रिमंडल में जगह पाने से मायूस उत्तराखंड की झोली में मोदी सरकार ने एक गौरवशाली पद डाल दिया है। पौड़ी जिले के घीड़ी गांव के मूल निवासी अजीत डोभाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया है।
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अजीत डोभाल पौड़ी जिले के कोट ब्लॉक के घीड़ी गांव के रहने वाले हैं। अजीत डोभाल को पीएम के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद का दायित्व सौंपने का समाचार सुनकर करीब पच्चीस परिवारों वाला यह गांव खुशी से झूम उठा। गांव के लोगों ने एक दूसरे को बधाई दे रहे हैं।

गांव के प्राथमिक स्कूल से की पढ़ाई

अजीत डोभाल के पिता गुणानंद डोभाल बंगाल इंजीनियरिंग ग्रुप (बीईजी) में मेजर थे। तीसरी कक्षा तक अजीत भी गांव के प्राथमिक स्कूल में पढ़े थे।

बुजुर्गों के मुताबिक अजीत बचपन में काफी सरल स्वभाव के थे। तकरीबन 11 साल की उम्र में अजीत रुड़की चले गए। लेकिन गांव से नाता बना रहा। समय-समय पर गांव आते रहे हैं। आखिरी बार वह 1999 में आए थे।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव बाल कुंवारी मंदिर में हर साल 22 जून को वार्षिक पूजा होती है। उन्हें आने का वक्त नहीं मिलता लेकिन पूजा के लिए भेंट भेजना नहीं भूलते हैं।

कंधार विमान अपहरण कांड में द‌िलायी कामयाबी

प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बने अजीत डोभाल 1968 बैच के आईपीएस हैं। जनवरी 2005 में वे आईबी के निदेशक पद से रिटायर हुए। 1988 में इन्हें कीर्ति चक्र से भी सम्मानित किया जा चुका है।

डोभाल देश के पहले ऐसे पुलिस अफसर हैं जिन्हें यह सम्मान मिला। 1999 में जब आतंकवादी आईसी-814 विमान को हाईजैक कर कंधार ले गए थे तो तब डोभाल ने कंधार जाकर यात्रियों को छुड़ाने में अहम भूमिका निभाई थी।

पाकिस्तान में भी रहे हैं डोभाल

छह साल तक पाकिस्तान में रह चुके डोभाल दुनिया भर की सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली से वाकिफ हैं। यही नहीं, उनके खाते में कई आतंकी संगठनों के नेटवर्क को तहस-नहस करने की भी उपलब्धि है।

मौजूदा समय में डोभाल विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के निदेशक थे।

गांव वाले खुश, पर कुछ मांगे भी

गांव में पले बढ़े बच्चे की इस कामयाबी से खुशी हुई है, बड़े पद पर पहुंचने के बाद उन्हें गांव के लिए कुछ काम करना चाहिए।
-दामोदर डोभाल, घीड़ी गांव

रिश्ते में अजीत मेरा नाती लगता है। अजीत के इतने बड़े ओहदे पर पहुंचा हमारे लिए गर्व की बात है।
-कृतिकानंद डोभाल, घीड़ी गांव

इतने बड़े पद पर पहुंचता देखकर मुझे बड़ी खुशी हो रही है। मुझे भरोसा है वह अपने दायित्व को बखूबी से निभाएगा।
-सावित्री देवी, घीड़ीगांव

अजीत का पीएम काराष्ट्रीय सुरक्षा सहालकार बनना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। इससे घीड़ी गांव ही नहीं पूरा क्षेत्र खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
-नेत्र सिंह निवासी धनाऊ गांव
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पलायन मार से नहीं बच पाया गांव

पौड़ी मुख्यालय से 32 किमी दूर कोट ब्लाक का घीड़ी गांव भी पलायन की मार से नहीं बच पाया है।  गांव में पहले 85 परिवार रहते थे। अब गांव में 25 परिवार ही रह गए हैं।

पक्की नहीं बन सकी क्षेत्र की सड़क
घीड़ी गांव को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाली सड़क अभी पूरी तरह पक्की नहीं हो पाई है। यह सड़क पौड़ी से गुंमाई तक तो पक्की है। गुमाई से आगे का हिस्सा अभी कच्चा है।

गांव के लोगों को सड़क तक आने के लिए आधा किमी पैदल चलना पड़ता है। चिकित्सा सुविधा न होने के कारण लोगों को उपचार के लिए पौड़ी आना पड़ता है। गांव में पानी की कमी से भी ग्रामीण परेशान हैं।
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