उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के इस नए दांव से अब हरीश रावत की सत्ता और मजबूत हो गई है।
रावत की दरियादिली के चलते उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी आखिरकार किशोर उपाध्याय को मिल गई। दिल्ली में कांग्रेस नेता जनार्दन द्विवेदी ने देर रात इसकी घोषणा की।
उपाध्याय के अध्यक्ष बनने से हरीश रावत खेमे को और मजबूती मिली है। कांग्रेस आलाकमान ने उत्तराखंड में क्षेत्रीय और जातीय समीकरण बैठाते हुए किशोर उपाध्याय की नियुक्ति की है।
उपाध्याय गढ़वाल के ब्राह्मण नेता हैं। किशोर को दस जनपथ का भी करीबी माना जाता है।
आर्य ने 2013 नवंबर में सौंपा था इस्तीफा
निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य ने पिछले साल नवंबर में आलाकमान को इस्तीफा सौंप दिया था।
लोकसभा चुनाव में हार के बाद तय हो गया था कि पार्टी जल्द ही यह जिम्मेदारी किसी और सौंपेगी। पार्टी ने करीब सात महीने बाद नए अध्यक्ष की घोषणा की है।
हाल ही सरकार में शामिल सभी विधायकों को कोई न कोई अतिरिक्त पद भी दिया गया। सुबोध ने अध्यक्ष की कुर्सी की चाह में सरकार में कोई पद नहीं लिया था।
रावत के इर्द-गिर्द दिखते हैं किशोर
2012 का विधानसभा चुनाव हारने के बाद किशोर उपाध्याय की राजनीतिक सक्रियता भी कम हो गई थी हालांकि इस दौरान उन्होंने परिपक्वता का परिचय दिया है।
किशोर अधिकतर समय दिल्ली में रहे। हरीश रावत के मुख्यमंत्री बनने के बाद किशोर उत्तराखंड की राजनीति में सक्रिय हो रावत के इर्द-गिर्द दिखने लगे। हाल ही में निर्दलीय विधायक दिनेश धनै को मंत्री बनाया गया।
किशोर उपाध्याय की भी राजनीतिक जमीन टिहरी है और धनै यहीं से उन्हें हराकर विधायक बने हैं। ऐसे में किशोर को पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलनी तय मानी जा रही थी।
अध्यक्ष की कुर्सी पर थी बहुगुणा की नजर
हरीश रावत की ताजपोशी के बाद माना जा रहा था कि अब प्रदेश अध्यक्ष की कमान विजय बहुगुणा के करीबी को मिलेगी।
बहुगुणा इस कुर्सी पर अपने करीबी विधायक सुबोध उनियाल को बैठाना चाहते थे। पर इस दौड़ में विजय बहुगुणा खेमे को मुंह की खानी पड़ी है।
हालांकि पार्टी में एक गुट का कहना है कि समझौते के तहत ऐसा फैसला हुआ है। विजय बहुगुणा की राज्यसभा की दावेदारी अभी बरकरार है।
जबकि दूसरे गुट का कहना है कि कांग्रेस किसी भी हाल में बहुगुणा से सितारगंज सीट खाली नहीं कराएगी क्योंकि बीते लोकसभा चुनाव में कांग्रेस यहां भारी मतों के अंतर से हारी है।
ऐसे में सहयोगियों के दम पर चल रही कांग्रेस सरकार कोई जोखिम नहीं उठाएगी।
किशोर उपाध्याय: एक नजर में
- 1996 में पार्टी संगठन चुनाव में उत्तर प्रदेश से एआईसीसी में सदस्य।
- राज्य गठन के बाद उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी में महामंत्री रहे।
- 2002 में टिहरी से विधायक बन एनडी तिवारी सरकार में औद्योगिक विकास राज्यमंत्री बने। कैबिनेट का कोटा तय होने पर मंत्री प्रसाद नैथानी, शूरवीर सजवाण आदि के साथ इस्तीफा दिया।
- 2007 में भी टिहरी से विधायक बने।
- 2012 में टिहरी से चुनाव लड़े पर हारे।
जो दायित्व मिला है उसका निर्वहन पूरी ईमानदारी से करूंगा। सरकार के साथ संगठन का समन्वय भी जरूरी होगा।
- किशोर उपाध्याय