किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर प्रभावित गांवों में विरोध अब धार्मिक आस्था से भी जुड़ गया है। क्वानू की महिलाओं ने महासू देवता के दरबार में अर्जी लगाकर अपनी पुश्तैनी जमीन और आजीविका बचाने की गुहार लगाई।
किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर छह राज्यों के बीच 15 सितंबर को हुए समझौता ज्ञापन के बाद प्रभावित ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। शुक्रवार को क्वानू की महिलाएं महासू देवता मंदिर परिसर में एकत्र हुईं और परियोजना को लेकर सरकार को सद्बुद्धि देने की अर्जी लगाकर पुश्तैनी जमीन बचाने की गुहार लगाई।
विज्ञापन
महासू देवता मंदिर परिसर में जुटीं ग्रामीण सुशीला, अंजू तोमर, नवमी तोमर, भवानों देवी, सज्जो देवी, सामो देवी, आंशिक तोमर और रीना तोमर आदि ने कहा कि समझौता ज्ञापन के बाद किशाऊ परियोजना के आगे बढ़ने का रास्ता साफ हुआ है। इससे प्रभावित परिवारों में विस्थापन, मुआवजा, पुनर्वास और आजीविका को लेकर चिंता बढ़ गई है।
महिलाओं ने कहा कि परियोजना की आगे की कार्रवाई शुरू करने से पहले प्रभावित परिवारों के अधिकार स्पष्ट किए जाने चाहिए और उन्हें विश्वास में लिया जाना चाहिए।महिलाओं ने कहा कि क्षेत्र के ग्रामीणों की आजीविका कृषि, बागवानी और पशुपालन पर निर्भर है।
परियोजना के चलते केवल जमीन ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों की सामाजिक-सांस्कृतिक व्यवस्था और पुश्तैनी अधिकार भी प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण किसी भी कीमत पर अपनी पुश्तैनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं हैं।महिलाओं ने केंद्र और प्रदेश सरकार से किशाऊ बांध परियोजना पर पुनर्विचार करने की मांग की। इससे पहले मंगलवार को क्वानू में ग्रामीणों ने परियोजना के विरोध में केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर पुतला दहन किया था।