एशिया की दूसरी सबसे बड़ी परियोजना
टिहरी के बाद एशिया की दूसरी सबसे बड़ी इस परियोजना से उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के 17 गांव जलमग्न होंगे। जिससे करीब 1000 परिवारों का विस्थापन होगा। बहुउद्देशीय किसाऊ जलविद्युत परियोजना के पूरी होने के बाद 660 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। इसमें से उत्तराखंड को 350 मेगावाट बिजली के साथ ही उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश के किसानों को सिंचाई के लिए पानी भी मिल सकेगा। इससे यमुना में पानी की कमी भी दूर हो जाएगी।
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राज्यों के बीच सहमति का इंतजार
किसाऊ बांध परियोजना में सबसे बड़ी अड़चन हिमाचल प्रदेश की है। हिमाचल ऊर्जा सरप्लस राज्य है। हिमाचल का ही ज्यादा हिस्सा इस परियोजना से जलमग्न होना है। लिहाजा, राज्य इसमें गंभीरता नहीं दिखा रहा है। गृह मंत्रालय के कमान अपने हाथ में लेने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि सभी छह हितधारक राज्यों के बीच सहमति बन जाएगी।