वास्तव में यदि अखाड़ा उन्हें मान नहीं देता तो वे दूसरे धर्म में शामिल हो सकते थे। अब किन्नर अखाड़े ने वचन दिया है कि वह जूना अखाड़े के नियमों और रीति रिवाजों के अनुसार काम करेगा। अखाड़े के सभी नियमों का पालन करने का वचन किन्नर अखाड़े के प्रतिनिधियों ने दिया है।
हरि गिरि ने कहा कि भविष्य में किन्नर अखाड़े के बजाय इस अखाड़े से जुड़े हुए लोगों को जूना अखाड़े के नाम से जाना जाएगा। किन्नर अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा कि जूना अखाड़े ने उन्हें गले लगाकर बड़ा उपकार किया है। अब हमें सभी सदस्य जूना अखाड़े की रीति-नीति और नियमों का पालन करते हुए जीवन यापन करेंगे।