देश के सबसे बड़े किडनी सौदागर को यह याद नहीं है कि उसने कितनी किडनियां बदली हैं। बस उसे किडनी निकालने और प्रत्यारोपण करने का जुनून है। वह अकेले देहरादून में 40 से 50 किडनियां बदलने की बात कह रहा है। जबकि देशभर में वह कितनी किडनियों की खरदी-फरोख्त कर चुका है, यह उसे याद नहीं है। पुलिस को उसने बताया कि पुराने परिचित राजबीर चौधरी से मिलकर यह काला धंधा शुरू किया था। राजबीर के साथ देहरादून के एक प्रॉपर्टी डीलर का नाम भी सामने आया है। पुलिस अब उस पर शिकंजा कसने की तैयारी में है।
मूल रूप से महाराष्ट निवासी डॉ.अमित का नाम पहली बार वर्ष 1993 में किडनी को लेकर सुर्खियों में आया था, तब से लेकर अब तक वह इसी काले धंधे में मशगूल है। 10 देशों में अपना जाल फैलाने वाला अमित समय के साथ-साथ बड़ा किडनी सौदागर बन गया। उसकी वजह से ही सरकार को किडनी कानून बनाना पड़ा। उसकी डिग्री को लेकर भी विवाद है।
डॉ.अमित का कहना है कि उसके पास बीएमएस और बीएचएम की डिग्री है, जबकि सीबीआई उस डिग्री को सही नहीं मानती है। अमित की पहली पत्नी सुनीता मेडिकल पेशे से जुड़ी थी। पुलिस उसे नर्स तो अमित उसे चिकित्सक बताता है। सर्जरी की प्रेक्टिस करते-करते उसका हाथ बेहद साफ हो गया। मुंबई के अलावा जयपुर, गुजरात, गुंडगांव, हरियाणा के कुरुक्षेत्र में उसका द्वारा अस्पताल संचालित किए गए, जिनकी आड़ में किडनी की खरीद-फरोख्त का धंधा चलता रहा।
गुड़गांव में छह सौ के करीब किडनी बदलने का खुलासा होने के बाद वर्ष 2013 में सीबीआई डॉ.अमित को नेपाल से पकड़कर लाई थी। पुलिस हिरासत में डॉ.अमित यह कहता रहा है कि उसने सैकड़ों किडनी बदली हैं, सही आंकड़ा उसे याद नहीं है। देहरादून के लालतप्पड़ में वह जरूर 40 से लेकर 50 किडनियों को निकालने और बदलने की बात कबूल रहा है।