फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने नाबालिग के अपहरण के आरोपी को दोषी करार देते हुए तीन साल की सजा सुनाई है। अदालत ने 10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। आरोपी पर पॉस्को एक्ट में भी मुकदमा दर्ज किया गया था लेकिन अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में नाकाम रहा।
शासकीय अधिवक्ता अल्पना थापा के अनुसार, एक व्यक्ति ने 25 जनवरी 2020 को थाना सहसपुर में तहरीर दी थी कि उनकी नाबालिग बेटी शाम को बाजार गई थी। लेकिन, वह घर लौटकर नहीं आई। बाजार में उसे संजय निवासी मुबारकपुर मीरा भनेड़ा जिला बिजनौर यूपी के साथ देखा गया। शिकायतकर्ता ने शक जताया कि वह बेटी को बहला फुसलाकर अपने साथ ले गया है। सहसपुर थाने में आरोपी के खिलाफ तीन फरवरी को अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की धाराएं बढ़ाई गईं। घटना के कुछ दिन बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर नाबालिग को बरामद कर लिया था।
अपने बयानों में पीड़िता ने बताया कि वह संजय कुमार से प्रेम करती है और उससे शादी करना चाहती थी। परिजन पहले शादी के लिए तैयार थे लेकिन बाद में मुकर गए। 24 जनवरी 2020 को वह घर से हरिद्वार तक अकेली गई। इसके बाद नजीबाबाद पहुंची और संजय को बुलाया। दोनों संजय के घर गए तो परिजनों ने भगा दिया। इसके बाद वे हरिद्वार में किराये के कमरे में रहने लगे। यहां से पुलिस ने उसे पकड़ लिया। इस मामले में अभियोजन पक्ष संजय के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के आरोप को सिद्ध करने में असफल रहा। मंगलवार को अदालत ने केस पर फैसला सुनाते हुए दोषी को सजा सुनाई।