कुमाऊं में 108 और खुशियों की सवारी के पहिए फिर थमने लगे हैं। वेतन न मिलने के कारण 108 सेवा के कुछ कर्मी अवकाश पर चले गए हैं तो डीजल न मिलने के कारण कुछ एंबुलेंस और ‘खुशियों की सवारियां’ खड़ी हो गईं है। दोनों सेवाओं के थमने से मरीजों का खासी दिक्कतें उठानी पड़ीं।
जच्चा बच्चा केंद्रों की सेवाएं सबसे अधिक प्रभावित हुईं। खुशियों की सवारी की नि:शुल्क सुविधा न मिलने से गरीब लोग प्रसूता महिलाओं और नवजातों को महंगा किराया देकर टैक्सी व टेंपो से ले गए।
ऊधमसिंह नगर में नौ में से केवल दो, पिथौरागढ़ में नौ में से तीन, अल्मोड़ा में 12 में से आठ 108 एंबुलेंस चल रही हैं। हालांकि चंपावत और बागेश्वर में सभी 108 एंबुलेंस (पांच-पांच) चल रहीं हैं।
ऊधमसिंह नगर में आठ में से चार, अल्मोड़ा में तीन और पिथौरागढ़ में नौ में से चार खुशियों की सवारी के पहिए जाम हैं। जीवीके इमरजेंसी मैनेजमेंट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के राज्य प्रमुख मनीष टिंकू का कहना है कि गाड़ियों को तेल नहीं मिल पा रहा है और कर्मियों को तीन माह से वेतन नहीं मिला है। स्वास्थ्य विभाग समय से भुगतान नहीं कर रहा है।