दरअसल, अंडर-19 की जो टीम न्याय पंचायत स्तर से चुनकर आई थी, उसमें शामिल दो खिलाड़ी हिमानी और पारूल को बाहर का रास्ता दिखाकर बाहरी दो खिलाड़ी फौजिया अंसारी और प्रिया नेगी को टीम में शामिल कर लिया। टीम में शामिल दो खिलाड़ियों के दम पर रायपुर टीम ने मैच भी जीता।
मामले का जब अमर उजाला संवाददाता को पता चला तो उन्होंने अधिकारियों से सवाल किया। सवाल सुनकर रायपुर के क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी उमेश कापड़ी के हाथ पांव फूल गए। वह अपनी सफाई देने लगे। पहले तो मामले को निपटाने की कोशिश की लेकिन बाद में जब मामला अमर उजाला के माध्यम से जिला युवा कल्याण अधिकारी एसएस गुसाईं तक पहुंचा तो कापड़ी बैकफुट पर आ गए।
उन्होंने तत्काल सेमीफाइनल मुकाबला रद्द कर दिया। इसके बाद शाम को पुरानी टीम के साथ रायपुर और डोईवाला का सेमीफाइनल मुकाबला दोबारा कराया गया। इस मैच में रायपुर की टीम हार गई। मैच में डोईवाला की टीम ने 5-4 के अंतर से जीत दर्ज की।
रायपुर की टीम से गलती हो गई। हालांकि गलती केवल दो खिलाड़ियों की ही है। इससे हम पूरी टीम के खिलाड़ियों का नुकसान नहीं कर सकते। खेल महाकुंभ के मदद से हम नए टैलेंट को तराशते है। इसलिए हमने निणर्य लिया कि टीम को उन दो खिलाड़ियों के बिना ही सेमीफाइनल मैच फिर से कराया जाए।
- एसएस गुसाईं, जिला युवा कल्याण अधिकारी
बच्चों की गलती थी। कोई जिम्मेदार व्यक्ति ने नाम नहीं बदला। बच्चों ने ही पेपर के साथ छेड़छाड़ की है।
-उमेश कापड़ी, क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी, रायपुर
टीम में शामिल पुराने खिलाड़ी मैच के दौरान नहीं आ सके। इस वजह से हमने अपने अपने नाम डाल दिए थे।
-प्रिया नेगी, रायपुर टीम में शामिल खिलाड़ी