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Dehradun News: साथी पर हमले के बाद भी सबक नहीं ले रही खाकी

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साथी पर हमले के बाद भी खाकी सबक लेने को तैयार नहीं है। चंद दिनों पहले ही सिपाही को खनन माफिया ने ट्रैक्टर से कुचलने की कोशिश की थी। वह कई दिन आईसीयू में भर्ती रहा। इसके बाद अधिकारियों ने तो खूब सख्ती के दावे किए। मामला पुलिस मुख्यालय और मुख्यमंत्री तक पहुंच गया। जिलेभर में कार्रवाई की गई। बावजूद इसके कुछ सिपाही अब भी खनन माफिया की नमक हलाली कर रहे हैं। मुखबिर पालने वाली पुलिस खुद माफिया की मुखबिर बनकर उन्हें बचाने में लगी है।
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दअरसल, 26 फरवरी को कैंट क्षेत्र में कथित रूप से अवैध खनन की शिकायत पर गए सिपाही मनोज पर माफिया ने ट्रैक्टर चढ़ा दिया था। इसके बाद तमाम सवाल भी उठे थे। प्रमुख सवाल था कि आखिर इतने संवेदनशील मामले में सिपाही अकेला ही क्यों मौके पर गया। जबकि, उसे थाना प्रभारी को इसकी सूचना देनी चाहिए थी। यही नहीं, मौके पर एक कार भी खड़ी मिली थी। जबकि, बताया गया था कि सिपाही सुबह सैर पर निकला था। ऐसे में कार वहां तक कैसे पहुंची। इन सब सवालों का जवाब जानने के लिए ही पुलिस कप्तान ने इसकी जांच एसपी क्राइम को सौंप दी थी। फिलहाल जांच चल रही है।



इतना बड़ा मामला होने के बाद आदेश-निर्देशों का दौर चला। अवैध खनन सामग्री से भरे कई वाहनों पर कार्रवाई का दावा किया गया। इसी बीच आई सिपाहियों की मिलीभगत की खबर से फिर तमाम सवाल उठने लगे हैं। सिपाही पर हमला कर माफिया ने खुलेआम पुलिस को चुनौती दी थी। लगा था कि अब पुलिस इसे संजीदगी से लेगी और माफिया पर पारदर्शी रूप से कार्रवाई करेगी। लेकिन, इसके उलट कुछ सिपाही खनन माफिया की मुखबिरी कर रहे हैं।
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कोड वर्ड और इशारों में चलता है काम

दरअसल, जब भी अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई होती है तो चंद वाहनों को पुलिस पकड़कर थानों में खड़ा कर देती है। बड़ी मछलियों को जाने दिया जाता है। इसमें बड़ा हाथ इन सरकारी मुखबिरों का माना जाता है। इसमें कई बार अधिकारियों के करीब रहने वाले कर्मचारियों का हाथ भी माना जाता है। सारा धंधा कोड वर्ड से चलता है। मसलन, किसी शिकायत पर कोई अधिकारी कार्रवाई के लिए जाता है तो ये सरकारी मुखबिर फोन पर कोड वर्ड बताकर माफिया को पहले ही आगाह कर देते हैं।
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