बाबा केदारनाथ की उत्सव डोली बुधवार को गर्भ गृह से बाहर निकलकर केदार धाम की ओर प्रस्थान करेगी। विभिन्न पड़ावों से होते हुए डोली तीन मई को केदारनाथ धाम पहुंचेगी।
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चार मई को सुबह छह बजे वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ बाबा केदारनाथ मंदिर के कपाट ग्रीष्मकाल के छह माह के लिए आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खुलेंगे।
बुधवार को वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ बाबा केदारनाथ की उत्सव डोली को शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ से बाहर लाया जाएगा। इसके बाद पंचमुखी मूर्ति और उत्सव डोली को सजाकर उसकी विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी।
तीन मई को केदारनाथ पहुंचेगी डोली
रात्रि विश्राम के लिए डोली विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी पहुंचेगी। एक मई को गुप्तकाशी से डोली फाटा, दो मई को फाटा से गौरी माई मंदिर गौरीकुंड पहुंचेगी और तीन मई को गौरीकुंड से केदारनाथ धाम पहुंचेगी।
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चार मई को छह बजे वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ मेष लग्न में बाबा केदारनाथ मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे।
श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के कार्याधिकारी अनिल शर्मा ने बताया कि डोली प्रस्थान संबंधी सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं।
खराब मौसम बना व्यवस्था में बाधक
आपदा के बाद बाबा केदार के धाम को जिस हाल में छोड़ा गया था, वही स्थिति अब भी बनी हुई है। अगर यहां बदला है तो बर्फबारी के बाद यहां का नजारा।
केदारनाथ धाम के कपाट खुलने में अब महज चार दिन ही रह गए हैं। आगामी चार मई को ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग भगवान केदारधाम के कपाट खुलने के साथ ही यात्रा शुरू होनी है। लेकिन इस बार यहां आने वाले भक्तों को कड़ी परीक्षा से गुजरना होगा।
यह बात अलग है कि यात्रा से जुड़ी एजेंसियां युद्ध स्तर पर काम कर रही हैं। मगर, खराब मौसम के कारण व्यवस्थाएं धरी की धरी रह गई हैं।
धाम में गढ़वाल मंडल विकास निगम को यात्रियों की आवासीय सुविधा के लिए हट्स का निर्माण करना है। लेकिन अभी तक निगम की निर्माण सामग्री यहां नहीं पहुंची है। स्थिति यह है कि अभी तक टेंट लगाने के लिए भी धाम में जगह नहीं है।
बर्फ पड़ने से रास्ता हुआ खतरनाक
केदारनाथ मंदिर पहुंचने के लिए करीब दो किमी बर्फ के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। जबकि बर्फ पिघलने पर पूरा रास्ता कीचड़ से सन रहा है, जिससे फिसलन का खतरा पैदा हो रहा है।
केदारनाथ में एसटीएफ ने लकड़ी की बल्लियां और रस्सी की मदद से अस्थायी पुलिया बनाई है, जो सुरक्षित नहीं है। इसी स्थान पर बीते वर्ष एसडीएम अजय अरोड़ा की पैर फिसलने से मौत हो गई थी।
लिनचोली से ऊपर पैदल मार्ग और केदारपुरी में पांच से सात फीट बर्फ जमी हुई है। केदारपुरी में चारों तरफ सिर्फ बर्फ ही बर्फ नजर आ रही है।
18 अप्रैल को पहुंच गई थीं टीमें
पुलिस और बीकेटीसी की टीम 18 अप्रैल को ही केदारनाथ पहुंच गई थी। लेकिन 20 और 21 अप्रैल को भारी बर्फबारी से यहां स्थिति खराब हो गई है।
मंदिर में उरेडा द्वारा भी बिजली सप्लाई बहाल नहीं की जा सकी है। अधिकारियों की मानें तो जनरेटर से मंदिर को रोशन किया जाएगा। मंदिर समिति के अनुसार इस बार तीर्थयात्री मंदिर के साथ दिव्य शिला की परिक्रमा भी कर सकेंगे।
नहीं बज रही फोन की घंटी केदारपुरी में बीएसएनएल का मोबाइल टावर कुछ ही घंटे काम कर रहा है, जो डीजल पर निर्भर है। यहां अभी तक किसी भी प्रकार से कोई व्यवसायिक प्रतिष्ठान भी शुरू नहीं हो पाया है। मंदिर सहित धर्मशालाओं की छतें बर्फ से ढकी पड़ी हैं।
केदारनाथ में कड़ाके की ठंड बचने के लिए यात्री अपने साथ तीन जोड़ी मोजे, वाटर प्रूफ जूते और जैकेट, रैनकोट, सन-ग्लासेज और सन स्क्रीम सहित अन्य जरूरी सामान भी साथ लाएं।
ऐसे जुटा रहे पानी केदारनाथ धाम में पानी की सप्लाई तो हो गई है। लेकिन तापमान गिरने से पानी जम रहा है। इन हालातों में कर्मचारियों को बर्फ पिघलाकर पानी तैयार करना पड़ रहा है। बर्फ से एक बाल्टी पानी तैयार करने में कई घंटे लग रहे हैं। दूसरी तरफ धाम में रात के समय तापमान शून्य डिग्री से नीचे चला जा रहा है।
इनका है कहना केदारनाथ जो हेली कंपनियां जो सामान ढो रही हैं, वे अपने खर्चे पर लिनचोनी से केदारनाथ तक यात्रा को भी ले जाएंगी। -डा. राघव लंगर, डीएम रूद्रप्रयाग