क्या होती है एएलएस
जीवन रक्षक उपकरणों से लैस इस एम्बुलेंस की मदद से मरीजों की जान बचाई जाती है। इस एम्बुलेंस में वेंटिलेटर, डिफिब्रिलेटर के साथ ही जरूरी दवाएं होती हैं। साथ ही प्रशिक्षित मेडिकल टैक्नीशियन तैनात होता है। एएलएस में सबसे अधिक स्टोक से जुड़े मामलों के मरीजों का इलाज किया जाता है।
डीफ्रीजर मोर्चरी वैन की होगी सुविधा
केदारनाथ यात्रा में इस बार स्वास्थ्य विभाग को डीफ्रीजर मोर्चरी वैन की सुविधा भी मिलेगी। इस वैन से शवों को ले जाने में मदद मिलेगी। ऐसे में बर्फ की जरूरत नहीं होगी।
16-16 चिकित्सकों की होगी तैनाती
केदारनाथ यात्रा में स्वास्थ्य विभाग रोटेशन के आधार पर 16-16 चिकित्सकों की तैनाती करेगा। इस बार, केदारनाथ में फिजीशियन और सोनप्रयाग में आर्थोपैडिक विशेषज्ञ तैनात किया जाएगा। इसके अलावा गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर 14 मेडिकल रिलीफ पोस्ट भी संचालित की जाएंगी, जिसमें यात्रियों के प्राथमिक उपचार की सभी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। साथ ही ऑक्सीजन की सुविधा प्राथमिकता से मुहैया कराई जाएगी।
इन अस्पतालों में होगी जांच व इलाज
केदारनाथ यात्रा के लिए केदारनाथ में स्वास्थ्य विभाग विवेकानंद ट्रस्ट के साथ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराएगा। वहीं सोनप्रयाग में अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का संचालन किया जाएगा। यहां पर चिकित्सक व पैरामेडिकल स्टॉफ तैनात रहेगा। यहीं पर यात्रियों की जांच कर उन्हें आगे भेजा जाएगा। इसके अलावा जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग, सीएचसी अगस्त्यमुनि, एलोपैथिक चिकित्सालय गुप्तकाशी और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र फाटा में भी यात्रियों के इलाज की प्राथमिक सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। शवों के पोस्टमार्टम की सभी कार्रवाई जिला चिकित्सालय में होंगी।
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इनका कहना है
केदारनाथ यात्रा में इस बार एएलएस एम्बुेंलस संचालित की जाएगी। जल्दी ही यह एम्बुलेंस हमें उपलब्ध हो जाएगी। इस एम्बुलेंस के मिलने से कई जरूरतमंदों की जान बचाई जा सकेगी। साथ ही यात्रा में प्रत्येक यात्री के सेहत का ख्याल रखने के उद्देश्य से बेहतर से बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं। - डा. हरीश चंद्र सिंह मार्तोलिया, मुख्य चिकित्साधिकारी रुद्रप्रयाग