रामबाड़ा से केदारनाथ तक पैदल मार्ग गुलजार हो सकेगा। पैदल मार्ग पर खाली पड़ी सुरक्षित जमीन आपदा प्रभावित व्यापारियों को पट्टे या सालाना अनुबंध पर दी जाएगी। इसके लिए जिला प्रशासन की तरफ से सर्वेक्षण करवाया जा रहा है।
सर्वेक्षण के बाद जमीन की उपलब्धता, नजरी-नक्शा और प्रभावित व्यापारियों का डाटा शासन को भेज दिया जाएगा ताकि शासन आवंटन संबंधी निर्णय ले।
आपदा में ध्वस्त हुए थे पड़ाव
पिछले साल जून माह में जलप्रलय में केदारनाथ धाम सहित पैदल मार्ग पर स्थित गरुड़ चट्टी, घिनुरपाणी, रामबाड़ा, भीमबली और गौरीकुंड में अधिकांश होटल, दुकान, लॉज, धर्मशाला, ढाबे, भवन ध्वस्त हो गए थे।
प्रशासन प्रभावित लोगों को राहत राशि दे चुका है। लेकिन इस बार यात्रा के समय पड़ाव आबाद नहीं हो सके। पड़ाव आबाद नहीं होने से स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिल सका तो यात्रियों को सुविधाएं।
मार्ग निर्माण लगभग पूर्ण
रामबाड़ा से केदारनाथ धाम तक पुराना पैदल मार्ग बाढ़ में बह चुका है। अब ठीक नदी के दूसरे पार से नए एलाइमेंट में स्थायी मार्ग निर्माण लगभग पूर्ण हो चुका है।
इस मार्ग पर छोटी लिनचोली, बड़ी लिनचोली, छानी कैंप और केदारपूछड़ा (केदारनाथ बेस कैंप) नए पड़ाव बने हैं। फिलहाल यहां सरकारी स्तर पर यात्रियों के रुकने और ठहरने के लिए टैंट और प्री फेब्रिकेटेड की अस्थायी व्यवस्था की गई है।
इस व्यवस्था में अभी तक प्रभावित व्यापारियों को लाभ नहीं मिल पाया है। इसके अलावा सरकार भी लंबे समय तक यात्रियों को फ्री में खाने और रहने की सुविधा उपलब्ध नहीं करा सकती है। इसलिए प्रशासन इन पड़ावों में ऐसी जमीन ढूंढ रहा है, जहां प्रभावित व्यापारियों को दुकान या होटल चलाने के लिए जगह दी जा सके।