व्यापारिक गतिविधियां भी चौपट
स्थिति यह है कि घोड़ा-खच्चर से एक चक्कर में 50 किलो सामान ढुलान का 500 रुपये से 1000 रुपये तक भाड़ा देना पड़ रहा है। जिससे लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है। गौरीकुंड के पूर्व ग्राम प्रधान राकेश गोस्वामी, व्यापार संघ के पूर्व अध्यक्ष अरविंद गोस्वामी, अखिलेश गोस्वामी, गौरी शंकर आदि का कहना है कि आपदा के 50 दिन बीत जाने के बाद भी गौरीकुंड तक यातायात का संचालन नहीं हो पाया है। इन हालातों में बीमार, गर्भवती और अन्य जरूरतमंद को अस्पताल पहुंचाने में भी खासी दिक्कत हो रही है। साथ ही व्यापारिक गतिविधियां भी चौपट हो गई हैं। एनएच को कई बार अवगत कराने पर भी कार्य में तेजी नहीं लाई जा रही है।
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मलबे से पटा तप्तकुंड क्षेत्र
अतिवृष्टि से प्रभावित तप्तकुंड क्षेत्र मलबे से पटा है। यहां अभी तक साफ-सफाई के कोई प्रयास नहीं हो पाए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शासन, प्रशासन द्वारा गौरीकुंड की सुध नहीं ली जा रही है। जून 2013 की आपदा के बाद से केदारनाथ यात्रा के इस अहम पड़ाव को भुला दिया गया है। उन्होंने तप्तकुंड में जमा मलबे की सफाई कर संरक्षित करने की मांग की है।