उन्होंने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में केदारनाथ-तोषी-त्रियुगीनारायण और चौमासी-खाम बुग्याल-रेकाधार-केदारनाथ वैकल्पिक मार्ग को विकसित करने की जरूरत है। बता दें कि बीते अगस्त माह में त्रियुगीनारायण व तोषी के चार युवाओं ने भी केदारनाथ-तोषी-त्रियुगीनारायण मार्ग का सर्वे किया था। तब, दल में शामिल गीताराम सेमवाल ने बताया कि रास्ता पूरी तरह से सुरक्षित है और इस पर चढ़ाई भी कम है।
16 सदस्यीय दल में सेवानिवृत्त कैंप्टर कुंवर सिंह, सेवानिवृत्त सूबेदार मनोज सेमवाल, सेवानिवृत्त हवलदार रणजीत सिंह नेगी, पूर्णानंद भट्ट, प्रेमदत्त गोस्वामी, अतुल जमलोकी, धर्मेश नौटियाल, आशीष राणा, मानवेंद्र गैरोला आदि शामिल थे।
पांडवकालीन है यह मार्ग
कर्नल (सेवानिवृत्त) अजय कोठियाल ने दल में शामिल कई लोगों के हवाले से बताया कि केदारनाथ-तोषी-त्रियुगीनारायण पैदल मार्ग पांडवकालीन है। इस मार्ग पर कुछ स्थानों पर पत्थर की चट्टानें मिली हैं, जिसमें कटवा पत्थर निकाला गया है। उन्होंने तोषी व त्रियुगीनारायण के बुजुर्ग लोगों से बातचीत के आधार पर बताया कि पांडवों ने केदारनाथ में मंदिर निर्माण में इसी क्षेत्र से पत्थर निकाले और उन्हें तराशा और इस रास्ते से मंदिर तक पहुंचाया।