भगवान आशुतोष के 12 ’योर्तिलिंगों में शामिल केदारनाथ मंदिर के कपाट 3 मई को प्रात: 8.50 मिनट पर खोले जाएंगे। श्रद्धालु अगले छह माह तक बाबा केदार की पूजा-अर्चना कर दर्शन कर सकेंगे। मंदिर समिति व प्रशासन द्वारा यात्रा की तैयारियां जोरों पर की जा रही है।
6-कुमाऊं रेजीमेंट के बैंड और भक्तों के जयकारों के बीच 30 अप्रैल को पंचकेदार गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर से बाबा केदार की पंचमुखी भोग मूर्ति चल विग्रह डोली में अपने धाम के लिए प्रस्थान करते हुए रात्रि प्रवास के लिए फाटा पहुंचेगी।
1 मई को फाटा से रात्रि प्रवास के लिए डोली गौरीकुंड पहुंचेगी। 2 मई को प्रात: 7 बजे गौरीकुंड में बाबा केदार की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। इसके बाद बाबा केदार की डोली पैदल मार्ग से जंगलचट्टी, भीमबली, रामबाड़ा, लिनचोली, छानी कैंप, रुद्रा प्वाइंट होते हुए 17 किमी का सफर तय करते हुए भक्तों के उल्लास के बीच दोपहर 2 बजे तक केदारनाथ पहुंचेगी।
जबकि 3 मई को शुभ मुर्हूत पर रावल भीमाशंकर लिंग और मुख्य पुजारी द्वारा मंत्रो%चार और बाबा केदार की स्तुति के बीच प्रशासन और मंदिर समिति के अधिकारियों और विशेष अतिथियों की मौजूदगी में प्रात: 8.50 मिनट पर मंदिर के कपाट खोले जाएंगे।