मध्य प्रदेश के एक फक्कड़ के हाथों अपने साथी की नृशंस हत्या का यह पहला मामला नहीं है। बल्कि सप्तऋषि क्षेत्र से लेकर गंगा और गंगनहर के किनारों पर बसी तमाम बस्तियां अपराध और अपराधियों की बड़ी शरण स्थली हैं।
यहां कई बार सामूहिक हत्याकांड हुए तो कई अन्य जघन्य अपराध भी सामने आए। देह व्यापार और अन्य जरायम पेशों की तो यहां भरमार है। एक बार दो पुलिसकर्मियों पर हमला कर रायफलें लूट ली गई और दो अपराधियों को पुलिस कस्टड़ी से भी छुड़ा लिया गया था। तमाम वारदातों के बावजूद पुलिस का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है।
सप्तऋषि क्षेत्र से लेकर ज्वालापुर में जटवाड़ा पुल तक गंगा व गंगनहर किनारे अवैध बस्तियों की भरमार है। खासकर सप्त सरोवर व चंडीघाट क्षेत्र में बसी बस्तियां तो अपराधियों की शरण स्थली साबित हो रही हैं। मार्च 2001 में नशे में धुत्त फक्कड़ों ने शराब और मांस को लेकर हुए विवाद में तीन फक्कड़ साधुओं की हत्या कर दी थी। वर्ष 2003 में भी नीलधारा टापू पर ऐसे ही एक संघर्ष में महिला फक्कड़ साधु सहित छह लोगों की हत्या कर दी गई थी।
एक श्रमिक नेता की चाकू घोंपकर 2005 में की गई हत्या के अलावा वर्ष 1999 में दिल्ली के बहुचर्चित सुल्तान नामक अपराधी को रोड़ीबेलवाला में आपसी संघर्ष में ही चाकू घोंपकर मौत के घाट उतार दिया गया था।
शराब और गांजा पीकर झगड़ा करना रोज की बात है लेकिन वर्ष 2000 में यहां पुलिस लाइन के दो सिपाहियों पर आस पास के लोगों ने उस समय हमला बोल दिया था जब वे रुड़की कोर्ट में दो अपराधियों को पेश कराने के बाद रोशनाबाद ला रहे थे लेकिन पुलिसकर्मी अपराधियों की ओर से दिए गए लालच के चक्कर में शराब और शबाब का आनंद लेने रोड़ीबेलवाला पहुंच गए थे।