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Kedarnath: बीकेटीसी के अध्यक्ष बोले- गर्भ गृह से छेड़छाड़ की बात दुष्प्रचार का हिस्सा, विरोध करना औचित्यहीन

Fri, 16 Sep 2022 09:17 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

अजेंद्र अजय ने कहा कि गर्भगृह में सोने की परत चढ़ाने के मामले में धार्मिक मान्यताओं, परंपरा और पुरातत्व विशेषज्ञों की सलाह का पूरा पालन किया जा रहा है। महाराष्ट्र के एक भक्त के प्रस्ताव पर बीकेटीसी ने केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह की दीवारों पर सोने की परत लगाने की अनुमति सरकार से ली है।
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केदारनाथ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने कहा कि केदारनाथ गर्भ गृह में सोने की परत चढ़ाने का विरोध औचित्यहीन है। मंदिर के गर्भ गृह में छेड़छाड़ की बात दुष्प्रचार का हिस्सा है। 

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अजेंद्र अजय ने कहा कि गर्भगृह में सोने की परत चढ़ाने के मामले में धार्मिक मान्यताओं, परंपरा और पुरातत्व विशेषज्ञों की सलाह का पूरा पालन किया जा रहा है। महाराष्ट्र के एक भक्त के प्रस्ताव पर बीकेटीसी ने केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह की दीवारों पर सोने की परत लगाने की अनुमति सरकार से ली है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में गर्भगृह में चारों दीवारों पर चांदी की परतें लगी थी। शासन से अनुमति मिलने के बाद गर्भगृह में चांदी की परतें उतार दी गईं। 

Kedarnath: धाम के गर्भगृह की दीवारों पर लगेगी सोने की परत, सोमनाथ और काशी विश्वनाथ मंदिर की तरह होगी भव्यता
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उन्होंने बताया कि गर्भगृह के आवश्यक माप के अनुरूप सोने की परतें तैयार कर लगाई जाएंगी। गर्भगृह में पहले से चांदी की परतें लगी होने से सोने की परतें चढ़ाने में गर्भगृह में नाममात्र काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह में सोने की प्लेटें चढ़ाए जाने मामले में कुछ लोग विरोध कर रहे हैं, जो औचित्यहीन है। 

मंदिरों के गर्भगृह व स्तंभ मूल्यवान धातुओं व रत्नों से सजाए जाते थे। जिसका वर्णन द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर के इतिहास में मिलता है। वर्तमान में भी सोमनाथ व काशी विश्वनाथ समेत अनेक बड़े शिवालयों के गर्भगृह से लेकर बाहरी आवरण तक को सोने से सजाया गया है। जो लोग केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह में सोने की परत चढ़ाए जाने का विरोध कर रहे हैं, वे छेड़छाड़ करने का दुष्प्रचार कर भ्रम फैला रहे हैं। 

अजेंद्र ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि दशकों पहले तक केदारनाथ मंदिर की छत घास (स्थानीय भाषा में खाड़ू) से बनाई जाती थी। केदारनाथ मंदिर की छत के लिए खाड़ू घास उगाने के लिए कुछ खेत नियत थे। स्थानीय भाषा में उन ढालनुमा खेतों को खड़वान कहते हैं। उसके बाद समय बदला तो घास के स्थान पर छत पर पत्थर के पठाल लगाए गए।  उसके बाद टिन की छत और वर्तमान में तांबे के पतरों (शीट) की छत है।

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बीकेटीसी के सीईओ को ज्ञापन सौंप कार्य रोकने की उठाई मांग

केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह की दीवारों पर सोने की परत चढ़ाने का विरोध करते हुए तीर्थपुरोहितों ने श्रीबदरीनाथ-श्रीकेदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्यकारी योगेंद्र सिंह को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मंदिर के गर्भगृह में हो रहे कार्य को रोकने की मांग की। काम न रोके जाने पर धाम व केदारघाटी के अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन की चेतावनी दी।

ज्ञापन में केदार सभा के अध्यक्ष विनोद शुक्ला व महामंत्री कुबेरनाथ पोस्ती ने कहा कि केदारनाथ मोक्ष धाम है। ऐसे में केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह में सोने की धातु को लगाना परंपराओं के विरुद्ध है। कहा कि मंदिर समिति ने तीर्थपुरोहितों और हक-हकूकधारियों को बिना विश्वास में लिए यह निर्णय लिया है जो उन्हें मंजूर नहीं है। उन्होंने मंदिर के गर्भगृह में किए जा रहे कार्य को रोकने की मांग की।

इधर, बीकेटीसी के सीईओ योगेंद्र सिंह ने बताया कि तीर्थपुरोहित अपनी बात रखना चाहते हैं इस संबंध में उनसे विचार-विमर्श किया जाएगा। बताया कि केदारनाथ पुनर्निर्माण से लेकर अन्य जो भी कार्य हो रहे हैं उनमें धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। 
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