केदारनाथधाम और आसपास के इलाके के पुनर्निर्माण के तौर-तरीकों पर उत्तराखंड सरकार ने अपनी मुहर लगा दी है। मंगलवार को देर रात तक चली मुख्यमंत्री हरीश रावत की अगुवाई कैबिनेट ने धाम के पुनर्निर्माण के ब्ल्यूप्रिंट को मंजूरी दे दी।
25 अक्तूबर तक हर हाल में निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। फैसला किया गया कि केदारनाथ मंदिर के पीछे और बाएं-दाएं कोई निर्माण नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही केदारनाथ धाम में पट्टाधारकों को भी जगह देने को मंजूरी दी गई।
सचिवालय में देर शाम कैबिनेट के फैसलों की जानकारी मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने दी। कैबिनेट ने तय किया कि जो भी निर्माण होगा उसमें जीएसआई की रिपोर्ट का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
केदारनाथ के पुनर्निर्माण में सबसे बड़ी समस्या पट्टाधारकों को लेकर थी। तय किया गया कि कुल 333 पट्टाधारकों को केदारनाथ में ही जमीन दी जाएगी। भवन अधिकतम दो मंजिला होंगे। पट्टाधारकों के अलावा करीब 200 अन्य लोगों, संस्थाओं, सरकारी विभागों की भी केदारनाथ में जमीन थी। इनको भी केदारनाथ में ही जमीन दी जाएगी।
मंदिर के तीन तरफ नहीं होगा कोई निर्माण
कैबिनेट ने यह भी साफ कर दिया कि केदारनाथ मंदिर के पीछे तीन लेयर की सुरक्षा दीवार बनेगी। मंदिर के पीछे, दाएं और बाएं कोई निर्माण कार्य नहीं होगा। मंदिर से लेकर नीचे पुल तक बीच में बीस मीटर का पूरा रास्ता छोड़ा जाएगा।
केदारधाम में निर्माण भी इस तरह से होगा कि देवदर्शनी से मंदिर साफ दिखाई दे। आपदा से ठीक पहले मंदिर के चारों ओर निर्माण की वजह से मंदिर देवदर्शनी से दिखाई नहीं देता था।
यह भी तय किया गया कि दस दिन के अंदर-अंदर केदारधाम के ब्लूप्रिंट पर सरकार हक-हकूक धारियों, साधु-संतों, तीर्थ-पुरोहितों और अन्य संबंधित वर्गों से बात करेगी और उनसे सहमति ली जाएगी।
कैबिनेट ने 25 अक्तूबर तक केदारनाथ में बेस कैंप के पास हैलीपैड तैयार करने को भी मंजूरी दी। तय किया गया कि हेलीपैड बन जाने केबाद एमआई 26 से भारी मशीनरी को केदारनाथ में उतार लिया जाएगा जिससे तुरंत ही निर्माण कार्य शुरू कराया जा सके। केदारनाथ में मंदिर के बांयी तरफ पहले से बने हेलीपैड का उपयोग सिर्फ इमरजेंसी में ही किया जाएगा।
केदारनाथ के लिए बनेंगे दो वैकल्पिक मार्ग
जून 2013 की आपदा से सबक लेते हुए कैबिनेट ने केदारनाथ धाम के लिए दो वैकल्पिक मार्गों के निर्माण को मंजूरी दे दी है। तय किया गया है कि इन मार्गों का निर्माण एस्केप रूट के तौर पर होगा और निर्माण कार्य भी हर हाल में एक साल के अंदर हो जाएगा।
इसके तहत केदारनाथ-त्रिजुगीनारायण-गरुड़चट्टी होगा पहला एस्केप रूट होगा और कालीमठ-चोमासी-भैरवमंदिर होगा दूसरा वैकल्पिक मार्ग होगा। इन दोनों रूटों को बनाने और एलाइनमेंट का सारा काम वन विभाग करेगा। पहला मार्ग करीब 14 किलोमीटर का है और दूसरा करीब 23 किलोमीटर का है।
विस्थापन के सवाल पर कैबिनेट ने यह साफ कर दिया है कि हर हालत में केदारनाथ रूट पर ही प्रभावित लोगों को भूमि आवंटित की जाएगी। घोड़ा पड़ाव और गरुड़चट्टी में भू स्खलन वाली जमीन का ट्रीटमेंट किया जाएगा। छोटी लिंचोली, बड़ी लिंचोली आदि स्थानों पर बसावट होगी। केदारनाथ के लिए लिंचोली से लेकर केदारनाथ तक रोपवे, गोल्फ कोर्ट आदि की व्यवस्था को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी।
छूट गए लोगों को मिलेगा मुआवजा
कैबिनेट ने मुआवजा पाने से वंचित रह गए लोगों को भी मुआवजा देने का फैसला किया। इसके लिए जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग को अधिकार दिए गए। जिलाधिकारी इस मामले की जांच करेंगे। छूट गए पालकी, घोड़े-खच्चर सहित अन्य लोगों को मुआवजा बांटेंगे।
जीएमवीएन की होगी भरपाई
इस बार की यात्रा में लोगों को खाना खिलाने से लेकर फेब्रीकेटिड हट बनाने तक का जिम्मा उठाने वाली जीएमवीएन को दस करोड़ रुपये देने की मंजूरी दी गई। जीएमवीएन ने बीस करोड़ रुपये की मांग की थी। इसी तरह जिला प्रशासन रुद्रप्रयाग को 19 करोड़ रुपये, निम और एसडीएफ को साढ़े नौ करोड़ रुपये देने को मंजूरी दी गई।
नौ हेक्टेयर जमीन पर कोई निर्माण नहीं
केदारनाथ मंदिर से लेकर भीमबली तक करीब नौ हेक्टेयर जमीन ऐसी है जिस पर कोई निर्माण नहीं होगा। जीएसआई ने इस जमीन को भू धंसाव के हिसाब से खतरनाक माना है। कैबिनेट ने स्पष्ट कर दिया कि इस जमीन को खाली ही रखा जाएगा।