वर्ष 2017 में छौड़ी में पहाड़ी से गिरे पत्थर के कारण एक यात्री की खाई में गिरने मौत हो गई थी। इसी वर्ष चिरबासा में भी पहाड़ी से गिरे पत्थर से एक महिला यात्री की मौत हो गई थी। वर्ष 2018 में भीमबली में भूस्खलन से एक, 2018, 2019 में दो-दो यात्रियों की पत्थर लगने से मौत हो गई थी।
बीते वर्ष 2022 में सोनप्रयाग से छानी कैंप तक बोल्डर और पत्थरों के कारण 6 यात्रियों की मौत हो गई थी। इस वर्ष 25 अप्रैल से शुरू हुई केदारनाथ यात्रा में अभी तक पत्थर लगने से तीन लोगों की मौत हो चुकी है।
केदारनाथ पैदल मार्ग पहाड़ी से पत्थर गिरने व भूस्खलन की दृष्टि से काफी संवेदनशील है। इसे देखते हुए सुरक्षा के हर संभव इंतजाम किए गए है। यात्रियों की सुरक्षा व सतर्कता के लिए सुरक्षा जवानों की तैनाती गई है।
- नंदन सिंह रजवार, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी रुद्रप्रयाग।