कहा जा रहा है कि पायलट के लिए 1500 घंटे फ्लाइंग अनुभव की शर्त में ढील देकर 750 घंटे कर दिया गया है। जिस ऑपरेटर को फरवरी 2026 में लाइसेंस दिया गया, उस कंपनी को केदारनाथ में हेली सेवा के लिए चयन कर लिया गया।
केदारनाथ हेली सेवा संचालन के लिए कंपनियों का चयन होने के बाद टेंडर पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) का कहना है डीजीसीए के दिशा-निर्देश व मानकों के अनुसार टेंडर के माध्यम से हेली ऑपरेटरों का चयन किया गया है। सुरक्षित हेली सेवा के लिए इस बार उन ऑपरेटरों को बाहर किया गया है, जिनके हेलिकॉप्टर पूर्व में दुर्घटनाग्रस्त हुए।
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हेली सेवा संचालन से इस बार पवन, हंस, केस्ट्रल, ग्लोबल विक्ट्रा, आर्यन एविएशन बाहर हुई है। अधिकारियों के मुताबिक इन कंपनियों को पर्वतीय क्षेत्रों में उड़ान का अच्छा अनुभव था लेकिन पूर्व में हुए हेलिकॉप्टर हादसों को देखते हुए यूकाडा ने नई कंपनियों का मौका दिया। अब इसी कारण टेंडर प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कहा जा रहा है कि पायलट के लिए 1500 घंटे फ्लाइंग अनुभव की शर्त में ढील देकर 750 घंटे कर दिया गया है। जिस ऑपरेटर को फरवरी 2026 में लाइसेंस दिया गया, उस कंपनी को केदारनाथ में हेली सेवा के लिए चयन कर लिया गया। जबकि ऑपरेटर के पास पांच साल का अनुभव होना चाहिए। टेंडर में दो साल का एक्सीडेंट फ्री का शपथ पत्र मांगा गया लेकिन जिस ऑपरेटर को कुछ माह पहले ही लाइसेंस दिया गया वह कैसे शपथ पत्र देगा।
डीजीसीए के दिशा-निर्देश पर पायलट के लिए 750 घंटे का अनुभव रखा गया है, जबकि यूकाडा की ओर से डीजीसीए को 1500 घंटे का अनुभव रखने की शर्त ही भेजी गई है। पूरी पारदर्शिता के साथ टेंडर के माध्यम से ऑपरेटरों का चयन किया गया है।
- आशीष चौहान, सीईओ, यूकाडा