केदारनाथ फिल्म का उत्तराखंड में प्रदर्शन नहीं हो रहा है। कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए सात जिलों में डीएम ने इस फिल्म का प्रदर्शन नहीं होने दिया है।
प्रदेश में सात जिलों में ही सिनेमाघर हैं। इन स्थितियों के बीच, पर्यटन और संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज इस मामले में लगातार मोर्चा खोले हुए हैं।
महाराज ने एक दिन पहले यह एलान किया था कि फिल्म निर्माता को नोटिस भिजवाया जाएगा। इसके अलावा, उत्तराखंड में होने वाली फिल्मों की शूटिंग से धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाएं आहत न होने पाए, इसके लिए कानून बनाया जाएगा।
महाराज ने कहा था कि फिल्म निर्माताओं से बाकायदा बांड भरवाया जाएगा। महाराज ने शनिवार को इस फिल्म पर रोक के बाद की स्थिति की समीक्षा की।
उन्होंने रुद्रप्रयाग के डीएम को जरूरी निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि इंटरनेट पर फिल्म का प्रदर्शन न होने पाए, इसके लिए केंद्र सरकार को चिट्ठी भेजी जाएगी।
दूसरी तरफ, संस्कृति सचिव दिलीप जावलकर का कहना है कि फिल्म को लेकर कानून बनाने के मामले में न्याय विभाग की राय भी ली जाएगी।
पर्यटन और संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज के बाद अब स्पीकर प्रेम चंद्र अग्रवाल भी केदारनाथ फिल्म के खुले विरोध में आ गए हैं।
शनिवार को स्पीकर ने कहा कि यह फिल्म धार्मिक भावना पर आघात है। फिल्म से लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंची है।
उन्होंने कहा है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर फूहड़ता बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने प्रदेश में फिल्म के प्रदर्शन पर रोक को स्वागतयोग्य बताया है।