- राज्य में आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) का गठन
- सभी तहसीलें व आपातकालीन केंद्र सेटेलाइट फोन से लैस
- आपदा प्रतिवादन तंत्र (आईआरएस) को लागू किया गया
- विभागों में आपदा प्रबंधन योजनाओं पर किया गया फोकस
- डिजास्टर रिस्क डाटा बेस (डीआरडीबी) तैयार किया गया
-भूकंप, भूस्खलन, बाढ़ की घातकता का आंकलन किया गया
- आपदा के दौरान त्वरित निर्णय लेने में मददगार बनेगा डीआरडीबी
- सिंचाई विभाग को रिवर मैनेजमेंट इन्फारमेशन सिस्टम से जोड़ा गया
- 12,000 सरकारी भवनों की घातकता का आंकलन किया गया
- 90 अस्पतालों को सुरक्षित बनाने के लिए रेट्रोफिटिंग प्रोजेक्ट पर काम
- मौसम का पता लगाने को 107 आटोमेटिक वेदर स्टेशन लगाए गए
- 25 सर्फेस फील्ड ऑब्जरवेटरी, 28 रेन गेज व 16 स्नो गेज लगाए
- 16300 स्वयं सेवकों को खोज एवं बचाव का प्रशिक्षण दिया गया
- राज मिस्त्रियों को भूकंप सुरक्षित भवन बनाने का प्रशिक्षण जारी हैं
- प्रदेश व जनपद स्तर पर मॉक अभ्यासों के जरिये सिस्टम को चौकन्ना रखा गया
- चमोली व रुद्रप्रयाग में विस्तृत भूगर्भीय अध्ययन किया
- बाढ़ के खतरे से बचाव के लिए भागीरथी व गंगा के किनारे साइनर लगाए
क्षमता विकास, जागरूकता, मौसम संबंधी सूचना तंत्र और तकनीकी सुधार के जरिये आपदाओं से बचाव के उपाय किए जा रहे हैं। हजारों सार्वजनिक भवनों का अध्ययन कराया जा रहा है, ताकि सुरक्षित बनाया जा रहा है। ये एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। आपदा प्रबंधन विभाग, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और आपदा प्रबंधन न्यूनीकरण में तैनात लोगों की टीम निरंतर लगी है। पिछले छह वर्षों के दौरान हमने काफी कुछ सीखा है और नए सुधार किए हैं।
- अमित नेगी, सचिव, आपदा प्रबंधन विभाग