गुप्तकाशी निवासी व्यापारी रामभरोसे बगवाड़ी, जिन्होंने करोड़ों के नुकसान से उभरकर पुन: अपने को स्थापित किया है और कारोबार को विस्तार देकर न सिर्फ स्वयं को सशक्त किया, बल्कि अन्य लोगों को भी रोजगार दिया। गुप्तकाशी में किराना की दुकान का संचालन करने वाले रामभरोसे बगवाड़ी आपदा से पूर्व सोनप्रयाग, गौरीकुंड और केदारनाथ में यात्राकाल का राशन व अन्य सामग्री सप्लाई करते थे।
साथ ही पड़ावों पर भी छोटे-छोटे कारोबारियों को राशन व अन्य सामग्री भी देते थे। इसके लिए उन्होंने सोनप्रयाग में राशन डिपो स्थापित कर रखा था, जिसमें सात बड़े-बड़े गोदाम थे। इन गोदामों में करोड़ों का सामना भरा रहता था, लेकिन 16/17 जून 2013 की आपदा में सभी गोदाम मंदाकिनी के सैलाब में बह गए। वहीं रामबाड़ा में भी जिन व्यापारियों को सामान दिया था, उनकी दुकानें भी सैलाब के भेंट चढ़ गई।
इन हालातों में व्यापारी बगवाड़ी की हालात बेहद खराब हो गई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अब, उन्होंने राशन सप्लाई के कार्य को छोड़कर रिसॉर्ट संचालन में हाथ अजमाया और बेटे दीपक और ज्योति के साथ स्वयं को दोबारा स्थापित किया। बीते दो वर्षों में बगवाड़ी सोनप्रयाग, गुप्तकाशी और श्रीनगर रिजॉर्ट खोल चुके हैं। साथ ही देहरादून में पहली आर्गेनिक मार्केट का संचालन भी शुरू किया है, जिसमें किसानों द्वारा जैविक उत्पादों को बेचा जा रहा है।
बगवाड़ी बताते हैं कि आपदा में वर्षों की मेहनत बर्बाद होने पर टूट सा गया था, लेकिन दोनों बेटों ने मेरा हौसला बढ़ाते हुए स्वयं मेहनत की। आज, तीनों रिसार्ट में 40 लोग भी काम कर रहे हैं। बागवाड़ी खुद गुप्तकाशी में परचून की दुकान संभालते हैं।