जून 2013 में आई आपदा का असर केदारनाथ से रूद्रप्रयाग तक काफी कुछ तबाह कर ले गया। इससे प्रभावित पुजारियों की हालत अब भी बदहाल है। आपदा में रूद्रप्रयाग जिले में गुप्तकाशी के समीप स्थित कालीमठ मंदिर का आधा हिस्सा भी बहा। मंदिर तक पहुंचाने वाला पूरा पुल ही बह गया।
मंदिर के पुजारियों को जब कोई सरकारी सहयोग नहीं मिला तो दानदाताओं की मदद से 40 लाख रुपये जुटाकर मंदिर के बहे हिस्से को फिर से बनवाया। जैसे-तैसे ग्रामीणों ने मंदिर तक जाने के लिए लकड़ी का छोटा पुल तैयार किया। इस बीच कोई श्रद्धालु मंदिर नहीं जा सका और अब भी मंदिर तक ले जाने को कोई सीधा रास्ता नहीं है।
ऐसे में मंदिर के 36 पुजारियों की आर्थिक स्थिति गड़बड़ा गई। पुजारी लगातार मांग कर रहे हैं कि जिस तरह से केदारनाथ के तीर्थ-पुरोहितों को मुआवजा दिया जा रहा है, उसी तरह से उन्हें भी दिया जाए। उनका कहना है कि सरकार ने कालीमठ सिद्धपीठ की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया, क्या हम आपदा प्रभावित नहीं है? कुछ समय पहले जब मुख्यमंत्री कालीमठ पहुंचे थे तब उन्होंने मुख्यमंत्री हरीश रावत के सामने भी अपनी बात रखी थी।
क्या कहते हैं पुजारी
आपदा के बाद से आर्थिक स्थिति इस कदर बिगड़ गई है कि बच्चों की पढ़ाई के लिए भी पैसा पूरा नहीं पड़ रहा है। कई आवश्यक चीजों में कटौती कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद पुजारियों की कोई सुध लेने वाला नहीं है।
- दिनेश गौड़, पुजारी, कालीमठ
बच्चों के भविष्य के लिए चिंतित हैं, इसलिए मुआवजा मांग कर रहे हैं। मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या घटने से आर्थिक स्थिति बिगड़ चुकी है। मंदिर तक पहुंचाने वाला रास्ता तक ठीक नहीं हुआ तो भला श्रद्धालु भी कैसे आएंगे?
- चंद्रमोहन भट्ट, पुजारी कालीमठ