बदरीनाथ हाईवे पर लामबगड़ भूस्खलन जोन और लामबगड़ गदेरे के साथ ही कई भूस्खलन क्षेत्र नासूर बने हुए हैं। ऑलवेदर रोड परियोजना कार्य से कई जगहों पर नए भूस्खलन जोन सक्रिय हो गए हैं। ऐसे में यहां वाहनों का संचालन खतरे से खाली नहीं है।
कर्णप्रयाग के समीप कालेश्वर में ऑलवेदर रोड परियोजना के तहत चट्टानी भाग पर हुए चौड़ीकरण कार्य से यहां बारिश होने पर मलबा हाईवे पर आ रहा है। चट्टान से पत्थरों के छिटकने का डर भी बना हुआ है।
भकुंड, देवलीबगड़, सोनला, प्रथाडीप, पुरसाड़ी, मैठाणा, बाजपुर, चमोली चाड़ा, क्षेत्रपाल, मैठाणा, गडोरा, पाताल गंगा और गुलाबकोटी में हाईवे चट्टानी भाग से गुजर रहा है। यहां पहाड़ी और चट्टानी भाग से पत्थर और मलबा हाईवे पर आ रहा है। बारिश होने पर इन जगहों पर वाहनों की आवाजाही भी खतरे से खाली नहीं है। गडोरा के पास पहाड़ी से पिछले तीन सालों से भूस्खलन हो रहा है जिससे आवासीय मकानों में दरारें आ गई हैं।
भूस्खलन क्षेत्र के शीर्ष भाग में जीआईसी गडोरा का भवन है। यह भवन भी धीरे-धीरे भूस्खलन की चपेट में आ रहा है। पाताल गंगा में वर्ष 2012 से चट्टान से भूस्खलन हो रहा है। यहां हाईवे के साथ ही होटल और मकानों को खतरा बना है। बदरीनाथ हाईवे पर इन दिनों लामबगड़ भूस्खलन जोन का स्थायी ट्रीटमेंट कार्य चल रहा है, लेकिन मौजूदा समय में यहां चट्टानी भाग से पत्थरों के छिटकने का डर लगातार बना हुआ है। लामबगड़ गदेरे में आज तक स्थायी ट्रीटमेंट कार्य शुरू नहीं हुआ है।
बदरीनाथ हाईवे पर ऑलवेदर रोड परियोजना के तहत चौड़ीकरण और सुधारीकरण कार्य चल रहा है। चट्टानी भागों पर हाईवे को सुगम बनाया जा रहा है। आगामी सालों में हाईवे के भूस्खलन जोन पर स्थायी ट्रीटमेंट कार्य हो जाएगा। इसी वर्ष लामबगड़ भूस्खलन क्षेत्र का भी स्थायी ट्रीटमेंट हो जाएगा।
- स्वाति एस भदौरिया, डीएम, चमोली