पहले रावल के आधिपत्य में था मंदिर
केदारनाथ के वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित और बीकेटीसी के सदस्य श्रीनिवास पोस्ती बताते हैं कि रावल केदारनाथ के लिए पुजारी अधिकृत करते हैं। साथ ही कपाट खुलने व बंद होने पर वे केदारनाथ धाम में मौजूद रहते थे। यहां तक कि यात्राकाल में भी वहां प्रवास करते थे। 321वें रावल नीलकंठ लिंग के समय तक मंदिर का पूरा आधिपत्य रावल के अधीन था। बाद में श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने रावल को एक वेतन भोगी कर्मचारी के तौर पर सीमित कर दिया। रावल के कार्यकाल का कोई निश्चित समय नहीं है।
ब्रह्मचारी होते हैं रावल
केदारनाथ के रावल नैरिष्ट ब्रह्मचारी होते हैं। परंपरानुसार पूर्व में रावल शीतकालीन गद्दीस्थलों में ही वर्षभर निवास करते थे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से शीतकाल में रावल सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए देश के अन्य राज्यों के भ्रमण पर जाते रहे हैं।
भकुंट भैरव थे पहले रावल
केदारनाथ के 320वें रावल विश्व लिंग, 321वें रावल नीलकंठ लिंग, 322वें रावल सांत लिंग और 323वें रावल सिद्घेश्वर लिंग रहे। पहले रावल भकुंट भैरव थे।