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पुरातत्व की संरक्षित सूची में नहीं केदारनाथ, बदरीनाथ

Wed, 17 Feb 2016 02:52 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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केदारनाथ, बदरीनाथ और दूसरे धाम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की संरक्षित सूची में शामिल नहीं किए जाएंगे। पुरातत्व सर्वेक्षण के अतिरिक्त महानिदेशक शरत शर्मा ने बताया कि इस संबंध में विभाग ने कोई प्रस्ताव तैयार नहीं किया है, लेकिन केंद्र सरकार के निर्देश पर स्थलों के निर्माण का क्षरण रोकने के लिए उपचार किया जाता रहेगा।
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अतिरिक्त महानिदेशक शर्मा न्यू कैंट रोड स्थित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करने आए थे। उन्होंने बताया कि संरक्षित और पुरातन विरासतों को सहेजने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानक अपनाए जा रहे हैं।

विभिन्न पत्थरों के बने स्मारकों पर अलग-अलग रासायनिक उपचार की जरूरत पड़ती है। उन्होंने बताया कि आपदा के दौरान केदारनाथ मंदिर के भवन को पहुंची क्षति को दुरुस्त किया जा चुका है। यहां अंतिम चरण का कार्य चल रहा है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के जागेश्वर और गोपेश्वर स्थल को आदर्श विरासत में शामिल किया गया है।
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विभागीय अधिकारियों ने बताया कि आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त हुए मंदिरों केजीर्णोद्धार के लिए पत्थर नहीं मिल रहे हैं। प्रदेश में खनन बंद होने से यह दिक्कत आई है। महंगे दामों पर पत्थर बाहर से मंगाने पड़ रहे हैं। प्रदेश में कारीगर भी नहीं है। इन्हें भी बाहर से बुलाया जाता है। प्रदेश के पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित स्थलों के अलावा सरकार के निर्देश पर दूसरे स्थलों के क्षरण को रासायनिक उपचार से ठीक किया जाएगा।
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मस्ट सी पोर्टल में मिलेंगी देशभर की विरासतें

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (विज्ञान शाखा) के बैनर तले ‘देश की सांस्कृतिक धरोहरों का उचित वैज्ञानिक विधियों के प्रभावशाली उपयोग द्वारा दीर्घकालीन संरक्षण’ विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

मंगलवार को कार्यशाला का उद्घाटन विभाग के अतिरिक्त महानिदेशक शरत शर्मा ने किया। उन्होंने बताया कि विभाग के मस्ट सी पोर्टल पर देश की 74 संरक्षित विरासतों को शामिल किया गया है। इसमें इन विरासतों का सारा ब्यौरा रहेगा। सैलानी इस पोर्टल पर जाकर सारी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

कार्यशाला का आयोजन विभाग की विज्ञान शाखा के सभागार में किया गया। अतिरिक्त महानिदेशक ने बताया कि मस्ट सी पोर्टल एक-दो हफ्ते में लॉच हो जाएगा। साथ ही पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कंजर्वेशन पोर्टल में संरक्षित इमारतों के कार्यों पर आए खर्चे आदि का पूरा ब्यौरा रहेगा। इस पोर्टल से लोग संरक्षित इमारतों की सूची हासिल कर सकते हैं। इस मौके पर अतिरिक्त महानिदेशक ने लैब का निरीक्षण किया और दिशा-निर्देश दिए।

कार्यशाला में चेन्नई जोन के बासु गौड भाष्यम ने महाबलीपुरम, आगरा जोन के डा. एमके भटनागर ने आगरा स्मारकों का वैज्ञानिक संरक्षण, डीए गुप्ता ने कला संरक्षण पर विचार व्यक्त किए। ‘हमारे स्मारक एवं इनका संरक्षण’ वृत्त चित्र का शरत शर्मा ने विमोचन भी किया। कार्यक्रम में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के निदेशक (विज्ञान) डा. विमल कुमार सक्सेना, निदेशक (पुरातत्व) डा. सैयद जमाल हसन, उमेश रावत आदि मौजूद रहे।
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