केदारनाथ वन्य जीव विहार के ऊपर नीची उड़ानों से कस्तूरी मृग समेत अन्य शेड्यूल-1 वन्य जीव वाकई परेशान हो रहे हैं। हेलीकॉप्टरों की घरघराहट से घबराकर वन्य जीव भाग रहे हैं।
भारतीय वन्य जीव संस्थान ने भी इसकी पुष्टि कर दी है। यह भी कहा गया है कि हेलीकॉप्टरों की उड़ानों में मानकों का उल्लंघन किया जा रहा है।
संस्थान की रिपोर्ट मिलने के बाद अब केदारनाथ के नजदीकी हैलीपेड को शिफ्ट करने पर मंथन किया जा रहा है। वन्य जीवों के तनाव की मल से लिए गए डीएनए सैंपल से पुष्टि हुई है। भारतीय वन्य जीव संस्थान ने यह रिपोर्ट वन विभाग दे दी है। इसे शासन को सौंप दिया गया है।
2013 में डीएफओ आकाश वर्मा ने रिपोर्ट दी थी
kedarnath
हेलीकॉप्टरों के मानकों का उल्लंघन करके नीची उड़ान भरने से केदारनाथ वन्य जीव विहार के वन्य जीवों को हो रही परेशानी के संबंध में वर्ष 2013 में डीएफओ आकाश वर्मा ने रिपोर्ट दी थी। तब इस रिपोर्ट की हंसी उड़ाई गई। इसे प्रमुख वन संरक्षक (वन्य जीव) कार्यालय ने दबा दिया। इस पर एनजीटी ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि भारतीय वन्य जीव संस्थान से शोध करवा कर यथास्थिति पता कराएं। संस्थान के सर्वे से डीएफओ आकाश वर्मा की दी गई रिपोर्ट की पुष्टि हो गई है।
इस संबंध में वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव कुमार बंसल ने भी सूचना के अधिकार के तहत भारतीय वन्य जीव संस्थान से जानकारी मांगी थी। इसमें भी संस्थान ने यही सूचना दी है। अधिवक्ता बंसल ने यह जानकारी नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल की पीठ को दी है। संस्थान की रिपोर्ट में बताया गया है कि जो हेलीकॉप्टर केदारनाथ से दूर हैं और डेढ़ किमी ऊंचाई से जाते हैं, उनसे नुकसान नहीं है, लेकिन कुछ हेलीकॉप्टर नजदीकी हैलीपैड से उड़ान भरते हैं उनसे अधिक दिक्कत हो रही है।
मानक जमीन से कम से कम पांच सौ मीटर ऊंचाई से उड़ान भरने के हैं और ये हेलीकॉप्टर बहुत से नीचे से जाते हैं। इन्हीं हैलीपैड को शिफ्ट करने की सिफारिश की गई है। प्रमुख वन संरक्षक (वन्य जीव) डीबीएस खाती ने बताया कि भारतीय वन्य जीव संस्थान की रिपोर्ट मिल गई है। इसे शासन को सौंप दिया गया। एक-दो हैलीपेड से दिक्कत बताई गई है।
अमर उजाला की मुहिम रंग लाई
केदारनाथ मंदिर
- फोटो : file photo
केदारनाथ वन्य जीव विहार में हेलीकॉप्टरों की नीची उड़ानों से वन्य जीवों को हो रहे नुकसान के संबंध में अमर उजाला की मुहिम रंग लाई।
वन विभाग और शासन ने डीएफओ की वर्ष 2013 में दी गई रिपोर्ट को दबा दिया गया था। दो साल के बाद अमर उजाला ने जब अभियान शुरू किया तो तत्कालीन वन मंत्री और स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री इसे नकारते रहे। लगातार मामला उभारते रहने पर एनजीटी ने इस पर याचिका दाखिल होने के बाद संज्ञान लिया। इसके बाद भारतीय वन्य जीव संस्थान को जिम्मेदारी दी गई।
वन्य जीवों के मल से लिए डीएनए की जांच हैदराबाद की लैब में कराई गई। यह साबित हो गया कि वन्य जीवों को मानकों का उल्लंघन कर भरी जा रही नीची उड़ानों से वन्य जीवों को दिक्कत हो रही है।