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ऑस्ट्रेलिया में लगी रोक तो यहां क्यों नहीं रुक सकते हेलीकॉप्टर

Sat, 08 Aug 2015 10:38 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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ऑस्ट्रेलिया की अदालत ने अदाणी समूह की 16.5 लाख अरब डॉलर की कोयला खान परियोजना सिर्फ इसलिए रद्द कर दी कि इससे छोटी छिपकली (यक्का स्किंक) और सजावटी सर्प की दो प्रजातियों पर खतरा आ सकता है।
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वहीं दूसरी तरफ केदारनाथ वन्य विहार के वन्य जीवों समेत वनस्पतियों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है और उत्तराखंड स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड हेलीकॉप्टर कंपनियों से कानून का पालन तक नहीं करवा पा रहा है। हेलीकॉप्टर कंपनियां बिना एनओसी के प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ानें भर रही हैं जिससे परेशान होकर वन्य जीव पलायन कर रहे हैं।

आस्ट्रेलिया की अदालत ने दो छोटे जीवों के लिए विश्व की सबसे बड़ी कोयला खान परियोजना को दरकिनार कर दिया है जबकि केदारनाथ वन्य विहार में शेडयूल-1 के दुर्लभ कस्तूरी मृग, हिमालयन गिद्ध का अस्तित्व खतरे में पड़ रहा है। इतना ही नहीं वनस्पतियों (फ्लोरा एंड फॉना) पर भी संकट आ रहा है।
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तितलियों के न रहने से फूलों का पोलीनेशन रुक जाएगा। वन्य विहार में रहने वाले पक्षी विभिन्न वनस्पतियों के बीज अपनी बीट के माध्यम से फैलाते हैं जिससे वनस्पतियों का फैलाव होता है। ये पक्षी भी हेलीकॉप्टरों के शोर की वजह से वन्य विहार से पलायन कर रहे हैं।

यह सारी जानकारी सुनी-सुनाई नहीं है वन विभाग के उप वन संरक्षक आकाश कुमार वर्मा ने प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक को भेजी अपनी रिपोर्ट में यह ब्योरा दिया और बिना एनओसी उड़ानें भर रहीं हेलीकॉप्टर कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस रिपोर्ट को सही ठहराते हुए अपर प्रमुख वन संरक्षक ने भी अपनी रिपोर्ट दी थी।

फिर भी फाइलें शासन और विभाग दोनों जगह दब र्गइं। स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड ने भी एनओसी के संबंध में कभी हेलीकॉप्टर कंपनियों से कुछ नहीं कहा।

उप वन संरक्षक, वन प्रभाग गोपेश्वर आकाश कुमार वर्मा का कहना है कि न्यूजीलैंड और अमेरिका में भी वन्य जीवों पर खतरा आने की वजह से हेलीकॉप्टर की उड़ानों पर रोक लगा दी गई थी। इस संबंध में शोध भी हुए हैं कि हेलीकॉप्टर के शोर से वन्य प्राणि प्रभावित होते हैं।

उत्तराखंड को राज्य बनवाने के पीछे एक मकसद यह भी था कि वन्य जीवों, पर्यावरण का कायदे से संरक्षण हो सकेगा। वन्य जीवों और पर्यावरण की असुरक्षा और बढ़ गई है। वन्य जीवों के लिए खतरा बन रहीं हेलीकॉप्टर उड़ानों को रोका जाना चाहिए।
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- पद्मश्री अनिल जोशी, पर्यावरणविद्
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