हादसे में एक कांवड़़िये की मौत और अन्य कांवड़ियों के जाम लगाने सूचना पर एसडीएम सुंदर सिंह, एसपी क्राइम देवेंद्र पिंचा, एएसपी राजेश भट्ट, जसपुर विधायक आदेश चौहान, कोतवाल चंद्रमोहन सिंह और कुंडा प्रभारी राजेश यादव वहां पुलिस फोर्स के साथ पहुंच गए।
कांवड़ियों ने कहा कि यहां किसी भी चौराहे और रास्तों पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं है। कांवड़ियों ने चंद्रावती कन्या महाविद्यालय और एमपी चौक पर भी जाम लगाया। जगह-जगह जाम से पुलिस के हाथ पांव फूल गए। इसी दौरान भाजपा और बजरंग दल के नेता भी कांवड़ियों के समर्थन में आ गए। उन्होंने आरोपी बस चालक की तत्काल गिरफ्तारी और दिवंगत शिवभक्त के आश्रितों को मुआवजा दिलाने की मांग की।
इस पर एसडीएम ने संबंधित विभाग से मुआवजे के लिए पत्राचार करने का भरोसा दिलाया। पुलिस अधिकारियों के एक घंटे के भीतर आरोपी की गिरफ्तारी करने के आश्वासन पर शिवभक्त शांत हुए। वहां भाजपा नेता गुरविंदर सिंह चंडोक, प्रशांत पंडित, आकाश कांबोज, मनोज बाली, राजीव परनामी, बंता पोपली आदि थे।
नहीं हो सकी मृत कांवड़िये की शिनाख्त
मृतक कांवड़िये के पास से मोबाइल फोन और कोई दस्तावेज उपलब्ध न मिलने के चलते उसकी शिनाख्त नहीं हो सकी है। अलबत्ता मृतक कांवड़िये के खेड़ा (रुद्रपुर) के होने की बात कही जा रही है। घटनास्थल पर कुछ कांवड़ियों ने मृतक की पहचान करने का प्रयास किया लेकिन चेहरा बुरी तरह कुचल जाने से उसकी शिनाख्त नहीं हो सकी। इससे शव के पंचनामे की कार्रवाई शुरू नहीं हो सकी है।
मिस्सरवाला में कांवड़िये को टक्कर मारकर फरार हुए रोडवेज बस के चालक और परिचालक सड़क किनारे बस खड़ी कर फरार हो गए। रुद्रपुर कोतवाली पुलिस के अनुसार सूचना मिलने पर रुद्रपुर पुलिस ने बस को पुलिस लाइन में खड़ा कराया। आरोपी बस चालक शामली (मेरठ) का निवासी बताया गया है। समाचार लिखे जाने तक मामले में रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकी थी।
सात वर्षों से कांवड़ लेकर आ रहा था मृतक
जिस जत्थे में शामिल कांवड़िये की मौत हुई है, उसने सोमवार रात को बिजनौर के ग्राम सुआवाला में शिव पंडाल में विश्राम किया था। सुआवाला से दूसरे जत्थे में कांवड़ लेकर आई रुद्रपुर की रम्पुरा निवासी प्रीती और भूतबंगला निवासी शिवानी ने बताया कि उक्त कांवड़िया उनके साथ ही सुआवाला में रुका था। मंगलवार को सुबह छह बजे वह वहां से चले थे। उन्होंने बताया कि कांवड़िया खेड़ा (रुद्रपुर) का निवासी था। युवतियों के मुताबिक मृतक कांवड़िये ने इस दौरान उन्हें बताया था कि वह पिछले सात वर्षों से कांवड़ लेकर आ रहा था।