उस समय उनकी शादी हुए साढ़े तीन साल हुए थे। घर में उनकी डेढ़ साल की पुत्री भी थी। पति के अपाहिज होने के बाद वह काफी टूट गई थी। इसके बाद पति और परिवार को खुद संभाला। पति ने भी उनका पूरा सहयोग किया।
बाद में उन्होंने पति को एक प्ले स्कूल खोलने का आइडिया बताया। उसके बाद उन्होंने 10 बच्चों से एक प्ले स्कूल शुरू किया। आज स्कूल में छात्र संख्या करीब 400 है। बताया कि स्कूल की मान्यता को लेकर दौड़ भाग उन्होंने ही की।
स्कूल से संबंधित बाहरी काम वे ही देखती हैं। घर रहते हुए पति की सेवा में लगी रहती है। उनका कहना है कि किसी त्योहार में दिखावा नहीं होना चाहिए। सच्ची सेवा करना किसी त्योहार से कम नहीं होती। साथ ही पति की सेवा या लंबी आयु के लिए दुआएं करना किसी त्योहार तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए।