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पीरियड्स आने पर यहां बेटियों को नहीं भेजा जाता स्कूल, वजह पढ़ेंगे तो इंसानियत से उठा जाएगा भरोसा

Sat, 27 Oct 2018 09:58 AM IST
दिनेश अवस्थी/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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सीमांत जिले के कई गांव ऐसे हैं, जहां आज भी बेटियों को महावारी के दौरान स्कूल नहीं भेजा जाता है। इंटर कॉलेज के रास्ते पर चौमू देवता का स्थान होने से माहवारी के दिनों में परिजन उन्हें स्कूल नहीं जाने देते हैं।

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विरोध करने पर परिजनों की फटकार सहने के अलावा छात्राओं के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं होता है। इस दौरान वह जो कुछ झेलती हैं, उससे बेटियों के मन में नकारात्मकता के भाव पैदा हो रहे हैं। यह स्थिति तब है जब देश में बेटियों को पढ़ाने और उन्हें आगे बढ़ाने के साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं करने के नाम पर कई जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। 

पिछले हफ्ते नैनीताल की महिलाओं के एक जागरूक दल ने जौलजीबी से पंचेश्वर तक पदयात्रा की। इस दौरान महिलाओं ने दूरस्थ गांवों में ग्रामीणों के साथ ही स्कूली छात्राओं से बात की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

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शिक्षा विभाग भी नहीं दे रहा साथ

दल तड़ीगांव, जलतुरी, ध्याण, क्वीतड़, सौरिया गांव से पंचेश्वर की ओर रवाना हुआ। सौरिया गांव में वार्ता के दौरान पता चला कि आंगनबाड़ी और हाईस्कूल होने के बावजूद अब भी अधिकतर लड़कियां पढ़ाई नहीं कर पा रही हैं।

इसकी वजह पूछने पर पता चला कि जिस स्थान पर इंटर कॉलेज है, वहीं पास में चौमू देवता का स्थान है। माहवारी के दिनों में लड़कियों के उस स्थान से गुजरने पर पाबंदी है। दल की अगुवाई कर रहीं नैनीताल विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. उमा भट्ट ने बताया कि उनकी सेल में कई छात्राओं से बात हुई।

छात्राओं ने भी इस परंपरा को गलत करार दिया। शिक्षक छात्राओं को विद्यालय आने के लिए प्रेरित करते हैं, लेकिन परिजन जाने नहीं देते हैं। आर्थिक रूप से संपन्न कुछ लोगों ने अपनी बेटियों को पढ़ने के लिए पिथौरागढ़ और अन्य स्थानों पर रिश्तेदारों के घर भेज दिया है।
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समाजसेवी भी दुखी

बेटियों के साथ भेदभाव की यह परंपरा काफी व्यथित करती है। बेटियों के साथ भेदभाव खत्म होना चाहिए और उन्हें खुले आसमान में उन्मुक्त उड़ने का मौका मिलना चाहिए। -डॉ. उमा भट्ट, पूर्व विभागाध्यक्ष हिन्दी, कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल।

किसी भी बेटी को माहवारी के दौरान शिक्षा से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। यदि कुछ क्षेत्रों में इस तरह की बात सामने आ रही हैं तो शिक्षा विभाग के अधिकारियों के माध्यम से जांच कराई जाएगी। साथ ही परिजनों और ग्रामीणों से भी वार्ता कर बेटियों को विद्यालय भेजा जाएगा। 
-वंदना, मुख्य विकास अधिकारी/ब्रांड एंबेसडर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ।
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