कार्तिक पूर्णिमा पर बीस लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने भगवान नारायण की कथा का श्रवण करने के साथ ही उनके निमित्त दान पुण्य भी किया। इसके साथ ही गंगा की पंचस्नानी भी संपन्न हुई।
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शनिवार को तड़के से ही हरकी पैड़ी और गंगा के अन्य घाटों पर श्रद्धालुओं का पहुंचने का क्रम शुरू हो गया था। सूर्योदय तक लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंच चुकी थी। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती गई।
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दोपहर 12 बजे तक गंगा के सभी घाट पैक हो गए थे। गंगा में डुबकी लगाने के बाद श्रद्धालुओं ने कुशावर्त घाट पर दिन भर देव निमित्त कर्मकांड कराए। अनेक श्रद्धालुओं ने मुंडन संस्कार संपन्न कराए।
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देवों के साथ-साथ पित्रों को भी अर्घ्य दिया गया। सूर्योदय के समय श्रद्धालुओं ने पूरब की ओर मुख कर भगवान सूर्य नारायण को जल अर्पित किया। स्नानार्थियों में सर्वाधिक भीड़ गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल, जम्मू कश्मीर से आए यात्रियों की थी।
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पर्वतीय अंचलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। भगवान विष्णु के लिए अनेक प्रकार के मीठे पदार्थ दान दिए गए। सायंकाल गंगा के दर्जनों तटों पर दीप जलाकर देव दीपावली मनाई गई।
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पूर्णिमा तिथि शुक्रवार को आने से बीते रोज दिवस भी देव दीपावली मनाई गई थी। इसके साथ ही पांच दिन चली गंगा की पंचस्नानी संपन्न हुई। महीना भर गंगा तट पर रहकर प्रतिदिन स्नान करने वाले कार्तिक स्नानार्थियों ने भोजों का आयोजन किया।
पंचपुरी में गंगा घाटों पर दो पहर आरती का आयोजन किया गया। प्रात:कालीन आरती सवेरे पांच बजे हुई और सायंकाल आरती छह बजे की गई। सर्वानंद घाट, कुशाघाट, श्रवणनाथ घाट, अग्रसेन घाट, गणेश घाट, सीता घाट, राजघाट, विश्वकर्मा घाट आदि पर आरती दर्शन के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़े।