8 ग्रिनेडियर के मेजर राजेश सिंह अधिकारी ने टोलोलिंग पर 30 मई को अपनी कंपनी के साथ चढ़ाई शुरू की। 15 हजार फिट की ऊंचाई पर भारी बर्फ बारी के बीच दुश्मन ने मशीन गन से उन पर धावा बोला। गंभीर रूप से जख्मी हालत में दो बंकर ध्वस्त कर मेजर राजेश सिंह ने प्वाइंट 4590 पर कब्जा किया। मेजर राजेश सिंह की इस वीरता और बलिदान के लिए महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।
चार्ली टीम ने मार गिराए पांच घुसपैठिये
स्पेशल फोर्सेज 9 पैरा के नायक बृजमोहन सिंह की अगुवाई में चार्ली टीम ने कारगिल के मशकोह सब सेक्टर में एक जुलाई को हमला बोला। बेहतरीन पर्वतरोही नायक ब्रिज ऊंचे बंकर पर चढ़े और दो दुश्मनों को हाथ से हाथ की लड़ाई में मार गिराया। इन्हें मरणोंपरात वीरता चक्र से सम्मानित किया गया।
गढ़वाल राइफल का दम
द्रास सेक्टर के प्वाइंट 4700 पर सर्वाधिक सैनिक शहीद हुए। 2 राजपूताना रायफ ल और 18 गढ़वाल रायफल के रणबांकुरों ने 30 जून की रात को चोटी पर हमला बोला। 18 गढ़वाल के नायक कश्मीर सिंह, रायफमैन अनसूया प्रसाद और कुलदीप सिंह दल का हिस्सा थे। तीनों वीरों ने घायल होने बावजूद दर्जन भर दुश्मनों को मार गिराया। इस युद्ध में हाथ से हाथ की लड़ाई में कश्मीर, अनसूया और कुलदीप ने अदम्य सहास दिखाया जिसके लिए उन्हें मरणोपरांत वीर चक्त्रस् से सम्मानित किया गया। इस युद्ध में लांस नायक देवेंद्र सिंह को सेना मेडल मिला।
नागा रेजीमेंट ने भी दी शहादत
6 और 7 जुलाई को कारगिल में टूईन बंप पर 2 नागा रेजीमेंट के सिपाही कैलाश कुमार, सिपाही राजेश गुरुंग, सिपाही संजय गुरुंग, नायक देवेंद्र सिंह ने चढ़ाई के दौरान दु्श्मन की आर्टिलरी बमबारी के बीच बंप फ तह करने में प्राण न्यौछावर किए। नायक देवेंद्र को वीरता के लिए मेंशन इन डिस्पैच से अलंकृत किया गया।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कारगिल शौर्य दिवस के अवसर पर भारतीय सेना के अदम्य साहस व शौर्य को नमन करते हुए वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। शौर्य दिवस की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि उत्तराखंड में सैनिकों की वीरता व बलिदान की लंबी परंपरा रही है। कारगिल युद्ध में बड़ी संख्या में उत्तराखंड के सपूतों ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहूति दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों एवं उनके परिजनों के कल्याण के लिए वचनबद्ध है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि भारतीय सैनिकों ने कारगिल युद्ध में जिस प्रकार की विपरीत परिस्थितियों में वीरता का परिचय देते हुए घुसपैठियों को सीमा पार खदेड़ा, उससे पूरे विश्व ने भारतीय सेना का लोहा माना। कारगिल युद्ध में देश की सीमाओं की रक्षा के लिए वीर सैनिकों के बलिदान को राष्ट्र हमेशा याद रखेगा।
राज्यपाल ने किया शहादत को याद
राज्यपाल डॉ. कृष्ण कांत पाल ने कारगिल शौर्य दिवस की पूर्व संध्या पर कारगिल युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। शौर्य दिवस पर जारी अपने संदेश में राज्यपाल ने कहा कि यह दिन भारतीय सेना के उन सभी अदम्य साहसी बहादुर जवानों के प्रति आभार व्यक्त करने और उनकी वीरता को याद करने का है, जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। कारगिल की विजय भारतीय सेना के महान साहस व रण कौशल का प्रतीक है जिसमें हमारे वीर जवानों ने विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों में भी दुश्मन को पराजित किया। राज्यपाल ने सभी वीर सैनिकों और उनके परिजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की है।