संत राम विशाल दास महाराज ने कहा कि सनातन धर्म किसी पर बलपूर्वक मत परिवर्तन का समर्थन नहीं करता। जो व्यक्ति अपनी श्रद्धा, स्वतंत्र इच्छा और अपने पूर्वजों की संस्कृति के प्रति आस्था के आधार पर सनातन मार्ग अपनाता है, उसका सम्मानपूर्वक स्वागत किया जाता है। श्रावण मास में शिवभक्ति के साथ यह दंपती अपनी जन्मभूमि में जलाभिषेक करने जा रहा है, यह उनके धार्मिक संकल्प और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक है।
शंकर (पूर्व नाम शहजाद) ने कहा कि सनातन धर्म में हमें पूजा, परंपरा और जीवन जीने की स्वतंत्रता व संस्कारों का अनुभव हुआ है। श्रावण मास में दूसरी बार कांवड़ जल उठाना हमारे लिए अत्यंत भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव है। हमारा मानना है कि हम सबके पूर्वज इस भूमि और इसकी सनातन परंपराओं से जुड़े हुए थे, इसलिए लोगों को अपनी जड़ों को समझने और सत्य को जानने का प्रयास करना चाहिए।