उत्तराखंड सरकार की ओर से कांवड़ यात्रा को स्थगित किए जाने के फैसले का समर्थन करते हुए कृषि उत्पादन मंडी समिति के अध्यक्ष संजय चोपड़ा ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर धन्यवाद जताया। साथ ही कोरोना कर्फ्यू के दौरान प्रभावित हुए सभी लोगों के लिए पानी-बिजली और स्कूल फीस माफ किए जाने की मांग को भी दोहराया।
मोती बाजार में हुई बैठक में उन्होंने कहा कोरोना संक्रमण की पहली और दूसरी लहर की वजह से हजारों लोगों ने अपनी जान गंवाई। कहा कि संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए सीएम ने कांवड़ यात्रा को स्थगित कर अच्छा निर्णय लिया है, लेकिन सीएम को लोगों की आर्थिक स्थिति को भी देखना चाहिए। इसमें कम से कम व्यापारियों को आर्थिक पैकेज देकर उन्हें राहत दी जाए।
उत्तराखंड में श्रावण मास के पहले दिन शिवभक्तों की आस्था पर कोरोना महामारी का पूरा असर देखने को मिला। अधिकांश शिवभक्तों ने अपने घरों के आसपास के मंदिरों में शिव पूजन किया। नीलकंठ धाम और बड़े मंदिरों में काफी कम संख्या शिवभक्तों ने भगवान शिव के जलाभिषेक पहुंचे वहीं दूसरे राज्यों से आने वाले शिवभक्तों की संख्या भी कम रही।
कांवड़ यात्रा रद्द होने के साथ पुलिस ने चेक पोस्ट पर सख्ती बढ़ा दी है। पुलिस ने कांवड़ियों को राज्य सीमा में दाखिल होने पर कड़ी कार्रवाई की चेतवानी भी दी है। श्रावण मास के पहले दिन पुलिस की चेतावनी का असर देखने को मिला। नीलकंठ धाम मोटर और पैदल मार्ग पर गिने चुने श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और पूजा अर्चना के लिए जाते दिखे। इनमें से भी अधिकांश स्थानीय लोग थे।
नीलकंठ धाम मंदिर में सीमित संख्या में श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। इसके अलावा चंद्रेश्वर महादेव मंदिर, वीरभद्र महादेव मंदिर और सोमेश्वर महादेव मंदिर जैसे बड़े मंदिरों में भी जलाभिषेक के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पहले के मुकाबले काफी कम थी। कोरोना महामारी से पहले हजारों की संख्या में स्थानीय और दूसरे राज्यों से आने वाले श्रद्धालु नीलकंठ धाम पहुंचते थे। स्थानीय मंदिरों के शिवालयों में जलाभिषेक के लिए शाम तक श्रद्धालुओं की कतार लगी रहती थी।