कांवड़ यात्रा को पूरी तरह से स्थगित कर दिया है, लेकिन स्थानीय निवासी या कोई भी बाहरी यात्री सादे कपड़े में हरिद्वार आ जाएगा तो उसे जल भरने से नहीं रोका जाएगा और न ही कोई कार्रवाई होगी। एडीएम प्रशासन बीके मिश्रा ने बताया कि कांवड़ियों की पहचान उसके गेरू कपड़े या समूह के रूप में आने से होती है, लेकिन स्थानीय व्यक्ति बिना कांवड़ के और या कांवड़ियों के वेष में आता है तो उस पर पाबंदी रहेगी।
भंडारे लगाने की नहीं मिलेगी अनुमति
सभी पुलिस अधीक्षकों ने इस बार यात्रा मार्गों में किसी भी प्रकार के राहत शिविर, भंडारों के आयोजन को प्रतिबंधित करने की बात कही। बैठक में तय किया गया कि किसी भी संस्था को शिविर और भंडारे लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसी तरह से कहीं पर भी कांवड़ बाजार नहीं सजेंगे और यदि कोई कांवड़ बेचते हुए पाया जाता है कार्रवाई की जाएगी।