रविवार से हरिद्वार का प्रसिद्ध कांवड़ मेला शुरू हो गया है। श्रावण के पहले दिन दूर जाने वाले हजारों कांवड़ियों ने गंगाजल भरा और वापस लौट गए।
वाहनों का रूट डायवर्जन भी लागू
कांवड़ियों का आगमन दिनभर जारी रहा। लौटाने वालों में राजस्थान के कांवड़िये सर्वाधिक थे। वहीं दूसरी ओर, रविवार से भारी वाहनों का रूट डायवर्जन भी लागू हो गया।
कांवड़ यात्रा पहले ही दिन खासे रंग में नजर आई। गुरु पूर्णिमा के साथ शनिवार और रविवार के अवकाश आ जाने के कारण हरिद्वार में हर ओर भोले के भक्त ही नजर आ रहे थे।
पूर्णिमा के श्रद्धालु अपने वाहन से रविवार को वापस लौटे। कांवड़ियों की वापसी मध्य रात्रि 12 बजे के बाद शुरू हो गई थी। रविवार सुबह काफी संख्या में कांवड़िये सड़कों से वापस लौटते नजर आए। कांवड़िए बम-बम का जयघोष भी कर रहे थे।
प्रशासन के प्रतिबंधों की अवहेलना
इसी के साथ कांवड़ियों के आगमन का सिलसिला प्रारंभ हो गया है। विभिन्न रेल गाड़ियों, बसों और वाहनों से हजारों की संख्या में कांवड़िये नगर प्रवेश कर रहे हैं। प्रशासन के प्रतिबंधों के बावजूद कांवड़ बाजार नगर में भी खुल गया है।
रेलवे रोड, अपर रोड, भीम गोड़ा, खड़खड़ी, बाजार क्षेत्र में कांवड़ की अनेक दुकानें खुल गईं हैं। बनी बनाई कांवड़ सर्वाधिक बिक रही हैं।
इस समय चूंकि राजस्थान और मध्यप्रदेश के दूर जाने वाले कांवड़िये विद्यमान है, अत: मेला पूरी तरह शांत है। सावन के पहले दिन वर्षा हो जाने से कांवड़ियों का आनंद दोगुना हो गया।
आज से धीमी होगी कांवड़ यात्रा
सोमवार को पंचक लग जाने के कारण कांवड़ यात्रा कुछ धीमी पडे़गी। यद्यपि पंचकों में भी कांवड़ियों का आगमन और निर्गमन चलते रहते हैं, तथापि कुछ क्षेत्रों के कांवड़िये पंचकों में बांस और लकड़ी का स्पर्श नहीं करते।
फलस्वरूप कांवड़ यात्रा के शुरुआती दिनों में भीड़ हल्की रहने के आसार हैं। अलबत्ता कई बार कांवड़ियों ने अपनी संख्या से पंचकों को पूरी तरह नकार भी दिया है। 18 जुलाई को पंचक समाप्त हो जाएंगे।
भारी वाहनों का रूट भी बदला
कांवड़ मेले का रूट प्लान रविवार से लागू हो गया। रविवार से भारी वाहनों का रूट डायवर्ट कर दिया गया।
दिल्ली, मेरठ, मुजफ्फरनगर से हरिद्वार आने वाले वाहनों को मीरापुर, बिजनौर नजीबाबाद मार्ग से मंडावली होते हुए चिड़ियापुर से निकालकर हरिद्वरर की नीलधारा पार्किंग लाया गया।
दिल्ली, मेरठ, मुजफ्फरनगर से देहरादून और ऋषिकेश जाने वाले भारी वाहनों को देवबंद, गागलहेडी से छुटमलपुर होते हुए देहरादून निकाला गया।
सिडकुल क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयों के लिए रात्रि 11 बजे से सुबह चार बजे तक भारी वाहनों को चलने की अनुमति दी जाएगी। रोडवेज बसों और कार आदि सवारी वाहनों के लिए 21 जुलाई तक मुख्य मार्ग खुला रहेगा।