12 दिनी कांवड़ मेला समाप्त होने के बाद घरों में कैद हुए हरिद्वार के लोगों को गुरुवार को आजादी मिल गई।
बुधवार को मेले का आखिरी दिन था। मेले के अंतिम चार दिन हरकी पैड़ी के सात किलोमीटर दायरे में लगाया गया वाहनों का प्रतिबंध हटा दिया गया। वन-वे किए गए संपर्क मार्गों से बेरिकेडिंग हटा दिए गए हैं। विक्रम-ऑटो चलने शुरू हो गए हैं।
राष्ट्रीय राजमार्ग भी वाहनों के लिए खोल दिया गया है। तीनों सरकारी अस्पतालों में सुबह आपको डॉक्टर मिलेंगे। विकास भवन के सभी कार्यालयों में भी अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहेंगे। लेकिन कांवड़ मेले के लिए चलाई गई पांच स्पेशल ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया गया है।
सभी रास्तों से हटाए बेरिकेडिंग
कांवड़ यात्रा के चलते पुलिस प्रशासन ने भीड़ को कंट्रोल करने के लिए संपर्क मार्गों पर जगह-जगह बेरिकेडिंग लगा दिए थे। ललतारौ पुल से आगे जीरो जोन किए जाने से तीमारदार, मरीज को वाहन में भी नहीं ले जा पा रहे थे।
बैरियर लगाने से स्टाफ को भी आवागमन में भारी दिक्कतों को सामना करना पड़ रहा था। लेकिन गुरुवार से सभी रास्ते खोल दिए गए हैं। किसी मरीज को महिला, जिला एवं मेला अस्पताल पहुंचने में कोई परेशानी नहीं होगी।
हाईवे से होकर गुजरेंगे वाहन
कांवड़ मेले के चलते दिल्ली जाने वाली बसों को वाया बिजनौर, चंदक, मोदीनगर होते हुए भेजा जा रहा था। इसकी वजह से परिचालक यात्रियों से 13 रुपए ज्यादा किराया वसूल रह थे। यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने में समय भी ज्यादा लग रहा था।
शिमला जाने वाली बसों को वाया पांवटा साहिब, चंडीगढ़ के रास्ते भेजा जा रहा था। इस रास्ते यात्रियों को करीब 58 रुपए किराया देना पड़ रहा था। लेकिन बुधवार को कांवड़ मेला समाप्त होने के बाद सभी बसें हाईवे से चलनी शुरू हो गई हैं। रोडवेज प्रशासन का कहना है कि गुरुवार से वाल्वो सहित सामान्य बसें अपने निर्धारित समय और रूट से चलेंगी।