कांवड़ यात्रा मनौती और मान्यताओं का बड़ा पर्व है। कोई बेटे की चाह के लिए कांवड़ उठा रहा है तो किसी को नौकरी की तलाश है। कोई परिवार में सुख समृद्धि के लिए तो कोई राष्ट्रभक्ति के नाम पर भगवान भोले की आराधना करने निकला है।
इन सबके बीच एक टोली ऐसी भी है जो हरियाणा के छोरे और छोरियों की यश और कीर्ति बढ़ाने और उन्हें बलवान बनाए रखने के लिए भगवान भोले शंकर की कृपा चाहते हैं। ये दल हरियाणा के छोरों को धाकड़ बनाए रखने की मन्नत मांगते हुए 30 साल से कांवड़ उठा रहा है।
श्रावण मास के तीसरे दिन नीलकंठ में 22 हजार श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। बम भोले के जयकारों से समस्त नीलकंठ क्षेत्र गुंजायमान हुआ। रात भर नीलकंठ जाने वाले पैदल मार्ग पर कांवड़ियों की आवाजाही लगी रही। शुक्रवार तड़के से ही शिवालयों में जलाभिषेक को शिव भक्तों की भीड़ उमड़ी। सुबह धूप खिलने के कारण कांवड़िये कम नजर आए।
दोपहर कुुछ देर की बारिश से कांवड़ियों को गर्मी से कुछ राहत मिली और बड़ी संख्या में कांवड़ियों ने नीलकंठ महादेव मंदिर की ओर रुख किया। बैराज मार्ग, रामझूला पुल, स्वर्गाश्रम, नीलकंठ पैदल मार्ग भोले के जयकारों से गूंजा। श्रावण मास के पहले दिन 30 हजार, दूसरे दिन 19 हजार और तीसरे दिन शुक्रवार शाम छह बजे तक 22 हजार कांवड़ियों ने नीलकंठ मंदिर में जलाभिषेक किया।