मंत्री ने कहा कि कंडी मार्ग का निर्माण न होने से कोटद्वार से रामनगर जाने के लिए प्रदेश के लोगों को उत्तर प्रदेश के नजीबाबाद-नगीना-धामपुर-अफजलगढ़-काशीपुर होकर जाना पड़ता है।
इस मार्ग की दूरी 172 किमी है। उन्होंने कहा कि कंडी मार्ग का ग्रीन मार्ग के रूप में निर्माण किया जाएगा। भारतीय वन्य जीव संस्थान के तकनीकी निर्देशन पर निर्माण एजेंसी एनबीसीसी मार्ग की संभावित रिपोर्ट तैयार करेगी। मार्ग निर्माण को लेकर राज्य वन्य जीव बोर्ड, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण अधिकरण एवं राष्ट्रीय वन्य जीव बोर्ड से अनुमोदन प्राप्त करेगी।
अपर मुख्य सचिव डा. रणवीर सिंह ने कहा कि मार्ग का निर्माण इस तरह से किया जाएगा, जिससे वन्य जीवन प्रभावित न हो। एनबीसीसी के कार्यकारी निदेशक योगेश शर्मा ने कहा कि आठ महीने के भीतर डीपीआर तैयार हो जाएगी। वहीं वन्य जीव बोर्ड से अनुमति के बाद अगले दो साल के भीतर मार्ग का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
पर्यटन को बढ़ावा और हजारों लोगों को मिलेगा रोजगार
कृषि मंत्री ने कहा कि लगभग दो से तीन हजार करोड़ की लागत से इस मार्ग का निर्माण होगा। निर्माण एजेंसी एनबीसीसी को डीपीआर के लिए राज्य सरकार की ओर से 50 लाख रुपये दिए जा चुके हैं। इस मार्ग के निर्माण से हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। वहीं, वन्य जीवों को भी संरक्षित किया जाएगा।