बचपन में ही झलकने लगी थी प्रतिभा
नमिता की प्रतिभा की झलक बचपन में दिखने लगी थी। पिता देवेंद्र कालरा ने बताया कि जब नर्सरी में नमिता का एडमिशन कराया गया था तो उसकी प्रतिभा से प्रभावित होकर प्रबंधन ने उसे एक क्लास का वॉक ओवर देते हुए अगली कक्षा में प्रवेश दिया था। कक्षा दस में 92.5 प्रतिशत से ज्यादा नंबर पाकर नमिता ने टॉप थ्री में जगह बनाई। इस पर नमिता को दो साल तक फ्री शिक्षा ग्रीनवे सीनियर सेकेंडरी पब्लिक स्कूल ने दी। उसके दोनों भाई-बहनों को भी उसकी प्रतिभा का लाभ मिला। नमिता की बड़ी बहन अंकिता बैंकिंग की तैयारी कर रही है, जबकि भाई ने इस वर्ष कक्षा 11वीं की परीक्षा दी है।
होनहार के टिप्स
नमिता ने बताया कि अभी तक उनके परिवार से इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कोई बच्चा नहीं गया। नमिता की पूरे देश में पहला स्थान प्राप्त करने के मामले में खास पहलू यह भी है कि बीटेक करने के बाद उसने तीन साल तक पढ़ाई से दूरी बनाए रखी और पंजाब में एक कंपनी में नौकरी की, लेकिन उसकी इच्छा पढ़ने की थी। नमिता ने बताया कि उसने गेट के लिए तैयारी की ओर अपने हिसाब से शेड्यूल तैयार कर पढ़ाई का टाइम टेबल तैयार किया। गेट अथवा अन्य परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बच्चों को नमिता की सलाह है किसी दूसरे को फॉलो करने से पहले अपना रोड मैप तैयार करें। क्योंकि आपको ज्यादा सफलता कैसे मिल सकती है और किस तरीके से आप खुद को सुखद महसूस करते हैं, यह आपको ही पता होता है। अब नमिता आईआईटी मुंबई में मशीन लर्निंग कर वैज्ञानिक बनना चाहिए।