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आप संग नए रोल में कंचन चौधरी भट्टाचार्य

Sun, 23 Mar 2014 01:20 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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खाकी के बाद अब खादी का नया रोल देश की पहली महिला पुलिस महानिदेशक रहीं कंचन चौधरी भट्टाचार्य को खूब भा रहा है।
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खादी नहीं पहनती
उनके बकौल काम करने वाले के लिए दोनों ही फील्ड एक जैसे हैं। यह भी बताना नहीं भूलतीं कि नेताओं वाली टोपी भी पार्टी की वजह से उन्होंने अपना जरूर ली, लेकिन खादी नहीं पहनती।

आखिर नेता के लिए खादी पहननी जरूरी नहीं, बल्कि दिल का साफ होना ज्यादा जरूरी है। लोक सभा चुनाव में हरिद्वार संसदीय सीट पर आम आदमी पार्टी (आप) प्रत्याशी के बतौर चुनाव प्रचार के बीच कुछ समय के लिए छुट्टी पा कंचन चौधरी भट्टाचार्य ने अमर उजाला से तसल्ली से बात की।
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पिता के संघर्ष से सीखा
बात अमृतसर की है। मैंने कालेज जाना शुरू ही किया था। पिता मदन मोहन मेहनत के साथ हम बहनों की परवरिश कर रहे थे। इस बीच कुछ लोगों ने हमारी जमीन पर कब्जा कर लिया। पिता ने विरोध किया तो उनको पीटा गया।

वह अस्पताल में भर्ती थे। उस वक्त मुकदमा लिखवाने तक के लिए हम भटक रहे थे। नेता से लेकर अधिकारी तक हर किसी का दर खटखटाया, लेकिन किसी ने भी मदद नहीं की।

आखिर एक बड़े मंत्री की सिफारिश पर मुकदमा लिखा गया। उस वक्त पिता का संघर्ष याद आता है तो खून खौलता है। ऐसे में कोई आम आदमी न्याय के लिए छटपटाता दिखता है तो उसमें पिता का चेहरा, उनकी तकलीफ नजर आती है।

पति भी आ रहे मुंबई से
पति देव भट्टाचार्य इस वक्त मुंबई की एक मल्टीनेशनल कंपनी में बिजनेस डेवलपमेंट का कार्य देख रहे हैं। उनसे ट्विटर के जरिए संपर्क बना रहता है। अब तो वह खुद मुंबई से आ रहे हैं। कुछ वक्त साथ रहेंगे। परिवार के सपोर्ट से ही अब तक सब होता आया है।

कैंपेन पर बेटियों की नजर
हरिद्वार संसदीय सीट से मेरे चुनाव कैंपेन पर बेटियों की भी नजर है। दोनों अपनी जिंदगी में बेहद व्यस्त हैं। कनिका शादीशुदा है और छोटी कावेरी लंदन के एक बैंक में ओवरसीज का काम देखती है। लेकिन बात होते ही चुनाव चर्चा जरूर होती है।
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हां, पुलिस में भी डरती हैं महिला
पुलिस की नौकरी के दौरान कई वाकये ऐसे आए, जब महिला पुलिस कर्मी अपनी व्यथा लेकर पास आईं। कई सह-कर्मियों के रवैये से उन्हें डर महसूस होता था।  मैंने उन्हें आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया था। कई कर्मियों ने शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद भी की।

2010 का एक मामला सनद
2010 में एक कर्मी के आर्मी में कार्यरत पति के खिलाफ कोर्ट से इंक्वायरी आई थी। मैंने देरी न करते हुए पूरा इन्वेस्टिगेशन कराया।

नियत अवधि में सुप्रीम कोर्ट रिपोर्ट भिजवाई थी। इस पर एक्शन हुआ था। ऐसे कई मामले हैं। ऐसे मामलों में जरूरत त्वरित कार्रवाई की होती है।
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