इस बार कैलाश मानसरोवर यात्रियों को नजंग से ही पैदल यात्रा शुरू करनी होगी। 13 जून से यात्रा शुरू करने वाला पहला दल सात दिन बाद चीन सीमा में प्रवेश करेगा। यात्रा की कुमाऊं मंडल विकास निगम ने तैयारी पूरी कर ली है।
कैलाश मानसरोवर यात्रियों का पहला दल 13 जून को धारचूला पहुंचेगा। कैलाश मानसरोवर यात्री धारचूला से नजंग तक 55 किलोमीटर की दूरी वाहन से तय करेंगे। इसके बाद नजंग से बोलायर की तीन किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पूरी कर मालपा और लामारी होते हुए 14 किलोमीटर के दुर्गम मार्ग से चलकर पहले पड़ाव बूंदी पहुंचेंगे। रात्रि विश्राम करने के बाद दूसरे दिन 17 किलोमीटर चलकर गुंजी शिविर में पहुंचेंगे।
तीसरे दिन नाबी गांव में रात्रि विश्राम करेंगे। वापस गुंजी लौटकर चौथे और पांचवें दिन भी गुंजी में ठहरेंगे। जहां पर यात्रियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। छठे दिन गुंजी से कालापानी होते हुए 18 किलोमीटर पैदल चलकर नाभीढांग पहुंचकर रात्रि विश्राम करेंगे।
सातवें दिन नाभीढांग से सुबह चार बजे आठ किलोमीटर पैदल चलकर भारत-चीन सीमा पर स्थित लीपूलेख पहुंचेंगे। यहां से लगभग एक किलोमीटर आगे चलकर चीन में प्रवेश करेंगे। वहां से वाहन से चीन की मंडी तकलाकोट को रवाना होंगे।
कैलाश यात्रा को देखते हुए कुमांऊ मंडल विकास निगम ने सभी पड़ावों में कर्मचारी तैनात कर दिए हैं। यात्रा अधिकारी दीवान सिंह बिष्ट ने बताया कि सभी पड़ावों बूंदी, गुंजी, कालापानी, नाभीढांग, कुटी और जौलिंगकांग में यात्रियों की सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जाएगा।