ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। वीर चले देखो लड़ने, दुश्मन से सरहद पर भिड़ने... का जज्बा लेकर 45 युवा सहायक कमांडेंट सोमवार को भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) बल की मुख्यधारा में शामिल हो गए। इन्होंने आईटीबीपी अकादमी मसूरी में 25 सप्ताह का कठोर प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस दौरान डीजी आईटीबीपी एसएस देसवाल ने पासिंग आउट परेड की सलामी ली। साथ ही सर्वोत्तम प्रशिक्षणार्थी बृजेश कुमार को सम्मानित किया गया।
पासिंग आउट परेड के बाद वाह्य प्रशिक्षण क्रियाकलापों में सहायक कमांडेंट (सेनानी) रसपाल सिंह गुलेरिया और आंतरिक में सहायक सेनानी सुबोध कुमार को प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया। सोमवार को 11वें सेनानी और डीजी बैच का दीक्षांत और शपथ ग्रहण समारोह में डीजी एसएस देसवाल ने नए सहायक सेनानियों को बल की परंपराओं को आगे बढ़ाने की बात कही। कहा-उन्हें किसी भी तरह की चुनौतियों का सामना करने के लिए हमेशा तैयार रहना होगा। नए अधिकारियों में देशभक्ति का जज्बा जगाते हुए उन्होंने कहा कि वे बल की अग्रिम चौकियों का ज्यादा अनुभव लें ताकि हमारे देश की सीमाओं की तरफ कोई आंख उठाकर भी न देख सके। आईटीबीपी 19 हजार फीट तक की ऊंचाई पर स्थित अग्रिम चौकियों में माइनस 45 डिग्री तापमान में भी मुश्किल हालातों में मुस्तैदी से काम करने वाला अनुशासनिक व सुप्रशिक्षित बल है। यह बल सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ आंतरिक सुरक्षा को लेकर भी हमेशा अग्रणी रहा है।
कितने-किस राज्य से
>> उत्तराखंड : दो महिलाएं और 14 पुरुष सहायक कमांडेंट
>> हिमाचल : एक महिला और 05 पुरुष सहायक कमांडेंट
>> उत्तर प्रदेश : 12 सहायक कमांडेंट
>> राजस्थान : 04 सहायक कमांडेंट
>> बिहार : 02 सहायक कमांडेंट
>> हरियाणा : 01
>> महाराष्ट्र : 01
>> नागालैंड : 01
>> मणिपुर : 01
परमवीर चक्र विजेता से मिली प्रेरणा
सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षणार्थी का खिताब हासिल करने वाले रसपाल सिंह गुलेरिया ने कहा कि मैं वीर भूमि के उस जनपद से हूं जहां विक्रम बत्रा और मेजर सोमनाथ जैसे परमवीर चक्र विजेता रहे हैं। रसपाल सिंह हिमाचल प्रदेश के रहने वाले हैं। उन्होंने कहा कि भारत भूमि के यह दोनों वीर मेरे प्रेरणास्रोत हैं। रसपाल सिंह के पिता भी सेना से रिटायर्ड हैं।