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कॉमनवेल्थ देशों को राह दिखाएगा ‘कैलास’

Thu, 30 Mar 2017 05:50 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
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कैलास मानसरोवर यात्रा - फोटो : अमर उजाला
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कैलास पवित्र भू क्षेत्र परियोजना से 40 कॉमनवेल्थ (राष्ट्र मंडल) देशों को अपने यहां प्राकृतिक एवं सांस्कृ तिक विश्व विरासत खोजने और इनके विकास का रोड मैप बनाने की राह मिलेगी।
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इसके लिए वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) में आयोजित होने वाले सीएफसी-2017 में कैलास पवित्र भू क्षेत्र पर विशेष सत्र का आयोजन किया जाना है। इसमें यूनाइटेड नेशंस, ईसी मोड और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के विशेषज्ञ भाग लेंगे। कैलास पवित्र भू क्षेत्र परियोजना कॉमनवेल्थ देशों के लिए प्रेरणा स्रोत बन रही है।

कैलास पवित्र भू क्षेत्र विश्व भर में विशिष्ट है। तीन देशों के बीच ट्रांस बाउंड्री होने के साथ ही यह प्राकृतिक और हिंदू, बौद्ध धर्म और विभिन्न जनजातियों के सांस्कृतिक, धार्मिक व साझा सामाजिक विरासतों का मिश्रण है। यह एक ऐसा भू क्षेत्र है, जिसमें विश्व विरासतों की श्रंखला है।
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इसी वजह से यूनेस्को प्राकृतिक-सांस्कृतिक विश्व विरासत में इसका चयन किया गया है। इस भू क्षेत्र के उदाहरण से कॉमनवेल्थ देशों को बताया जाएगा कि ऐसी प्राकृतिक-सांस्कृतिक विरासतों और श्रंखलाओं को तलाश करें। कैलास पवित्र भू क्षेत्र परियोजना का काम देख रहे अंतरराष्ट्रीय संस्था ईसी मोड, भारतीय वन्य जीव संस्थान, जीबी पंत हिमालयन इंस्टीट्यूट आदि के विशेषज्ञ कॉमनवेल्थ देशों की विश्व विरासत के मद्देनजर रोड मैप बनाने में मदद करेंगे।

कैलास भू क्षेत्र में देश के इन संस्थानों ने दो चरणों का कार्य पूरा कर लिया है। इसके साथ ही नेपाल और चीन के विज्ञानी अपने क्षेत्र में कैलास परियोजना पर काम कर रहे हैं। एफआरआई में कॉमनवेल्थ फोरेस्ट्री कॉंफ्रेंस (सीएफसी)-2017 तीन अप्रैल से शुरू होगी। भारतीय वन्य जीव संस्थान के डीन डॉ. जीएस रावत ने बताया कि विशेष सत्र में कैलास परियोजना के अनुभव साझा किए जाएंगे और देशों को रोड मैप तैयार करने के लिए मशविरा दिया जाएगा।
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