कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग में बीआरओ की लापरवाही भारी पड़ रही है। सड़क खुली है, लेकिन सड़क में गिरा मलबा साफ न होने से वाहन रपटकर फंस रहे हैं।
वाहनों को धक्का मारकर पार करना पड़ रहा है। उच्च हिमालयी क्षेत्र में जाने वाले लोगों के साथ ही धारचूला से नारायण आश्रम तक कैलास यात्री भी गस्कू, मांगती की सड़क से वाहनों से जाते हैं।
धारचूला से 35 किमी दूर मांगती और गस्कू में सड़क जानलेवा बनी हुई है। सड़क कीचड़ से पट गई है। सड़क में बिखरे मलबे को हटाने की दिशा में बीआरओ काम नहीं कर रहा है।
गहरी खाई रपट सकते हैं वाहन
ऐसी ही लापरवाही चलती रही तो जरा सी चूक में किसी भी दिन वाहन 100 मीटर गहरी खाई में जा गिरेगा।
इस संबंध में एसडीएम प्रमोद कुमार का कहना है कि बीआरओ को पहले भी सड़क की दशा सुधारने के लिए कहा जा चुका है, एक बार फिर बीआरओ को लिखा जा रहा है।
जिलाधिकारी को भी इस संबंध में अवगत कराया जा रहा है। इसके साथ ही कैलास यात्रियों का छठा दल मानसरोवर और कैलास पर्वत की परिक्रमा कर बुधवार को वापस दिल्ली लौट गया है।
यात्रियों को कुमाऊं मंडल विकास निगम के काठगोदाम स्थित पर्यटक आवास गृह में प्रमाणपत्र और प्रतीक चिह्न दिए गए।
मानसरोवर में देखे प्रकाश पुंज
छठे यात्री दल में 59 यात्री थे लेकिन एक यात्री सुब्रह्मण्यम शेशाद्रि नाभीढांग में तबियत बिगड़ने पर पहले ही वापस लौट गए।
कैलास यात्रा पूरी कर लौटी राजस्थान की नेहा खंडेलवाल ने कहा कि यात्रा काफी अच्छी रही। मौसम कुछ खराब रहा लेकिन उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई।
उन्होंने मानसरोवर झील में प्रकाश पुंज आते देखा। इसे देखने के लिए वह रातभर जागती रहीं।
काली नदी में शिव, पार्वती करते हैं नृत्य
जयपुर (राजस्थान) के संदीप विजय ने कहा कि कैलास मानसरोवर अद्भुत है।
प्रकृति की गोद में भगवान के साक्षात दर्शन होते हैं। सभी लोगों को एक बार कैलास की यात्रा करनी चाहिए।
चेन्नई के वैंकटरामन ने कहा कि कैलास में पता चलता है कि शिव परिवार कितना बड़ा है और दुनिया कितनी बड़ी है। काली नदी में शिव, पार्वती का नृत्य देखने को मिलता है।