कई बार यात्रा कर चुके मानसरोवर यात्रियों की मानें तो मानसरोवर में तड़के आकाश से तारा मंडल के रूप में तीन देवता आकर स्नान करते हैं।
सरोवर के भीतर गया एक तारा
स्नान के बाद पुंज के रूप में कैलास पर्वत पर चले जाते हैं। वह इन्हें देव ऋषि और भगवान भोले, पार्वती का स्वरूप मानते हैं।
12वीं बार यात्रा पर जा रहे परेश कुमार जयंतीलाल भवसार ने बताया कि जब वह 2012 में यात्रा पर आए थे तो उन्होंने तड़के 3:15 बजे देखा कि एक तारा आकर सरोवर के भीतर तक गया। कुछ ही देर में वह ज्योति पुंज बनकर कैलास में समा गया।
पिछले कई सालों से देखते आ रहे हैं कि सरोवर में कई तारे आते हैं और उनकी ज्योति कैलास में चली जाती है। उन्हें भगवान कैलास के साक्षात दर्शन भी हो चुके हैं।
चौथी बार यात्रा पर जा रहे दिल्ली के पुनीत अरोरा कहते हैं कि भगवान शंकर पिछले चार साल से उन्हें हर बार बुला रहे हैं। वहां उन्हें ऊं पर्वत और भगवान शिव के दर्शन हुए हैं।
सरोवर में तारा पुंज के स्नान और ज्योति पुंज बनकर कैलास में जाने की बात वह भी कहते हैं।
कब से इच्छा थी, अब मनौती पूरी हुई
पश्चिम बंगाल से यात्रा पर आए विचेंद्र कुमार वैद्य और उनकी पत्नी इंद्राणी वैद्य पहली बार यात्रा पर जा रहे हैं। उनका कहना है कि कई सालों से यात्रा पर जाने का मन बनाया था लेकिन मौका नहीं मिल रहा था।
इस बार फरवरी में विज्ञापन देखा। उन्होंने तत्काल केएमवीएन के दिल्ली दफ्तर में संपर्क कर अपना पंजीकरण करा लिया। भगवान ने बुलाया तो उनका सेलेक्शन भी हो गया।