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दो करोड़ की गड़बड़ी ठंडे बस्ते में

Fri, 09 Aug 2013 04:52 PM IST
देहरादून/ब्यूरो
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कृषि विभाग के ऑडिट में दो करोड़ से अधिक की अनियमितता के मामले में शासन के आदेश के बावजूद दो माह बाद भी विजिलेंस जांच शुरू नहीं हुई है। मामला ऊधमसिंह नगर में भूमि संरक्षण कार्यों से जुड़ा है। अधिकारी मामले में कार्रवाई के बजाए, पूरे प्रकरण में लीपापोती में लगे हैं।
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कृषि विभाग ने ऊधमसिंह नगर में भूमि संरक्षण कार्य कराए थे। आडिट जांच में यहां एक करोड़ 26 हजार से अधिक का अनियमितता और 86 लाख का व्यर्थ व्यय सामने आया।

15 मई 2013 को शासन ने मामले में कृषि निदेशक को सुस्पष्ट आख्या के साथ ही विजिलेंस जांच के लिए प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए थे। लेकिन अब तक जांच शुरू नहीं हुई है। जिससे कृषि विभाग के अधिकारियों से लेकर कृषि मंत्री तक की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।
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आपत्तियों के बावजूद योजना अनुमोदित
आडिट जांच में पता चला कि ऊधमसिंह नगर की बिचपुरी जल संचय योजना पर निदेशालय स्तर से आपत्ति लगाई गई थी, लेकिन इनका निस्तारण किए बिना ही संयुक्त निदेशक कुमाऊं पवन कुमार ने योजना अनुमोदित कर दी। सेवलाकलां माजरा निवासी रमेश चंद्र चौहान की ओर से मांगी गई सूचना में यह खुलासा हुआ।

चार लाख 77 हजार की योजना को 20 मार्च 2008 को निदेशालय में अनुमोदन के लिए भेजा गया। 25 मार्च को निदेशालय ने आपत्तियां लगाई। संयुक्त निदेशक ने इससे पहले यानी 15 मार्च 2008 को ही योजना का अनुमोदन कर दिया था।

ऐसे हो रही लीपापोती
शासन का पत्र नंबर एक
20 मार्च वर्ष 2013 को शासन ने मुख्य कृषि अधिकारी जनपद ऊधमसिंह नगर को ऑडिट रिपोर्ट के संबंध में आख्या मांगी थी। संयुक्त सचिव देवेंद्र पालीवाल ने मुख्य कृषि अधिकारी को लिखे पत्र में कहा कि भूमि संरक्षण अधिकारी रुद्रपुर व काशीपुर से बिंदुवार आख्या प्राप्त कर कृषि निदेशालय को अवगत कराते हुए शासन को भी अवगत कराएं।

पत्र नंबर दो
मुख्यमंत्री कार्यालय के आदेश पर शासन ने कृषि निदेशक सीएस मेहरा को पत्र लिखकर मामले में विजिलेंस जांच की संस्तुति का प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए। अनुसचिव महावीर सिंह ने कहा कि प्रस्ताव के साथ ही प्रकरण के प्रत्येक बिंदुओं पर सुस्पष्ट आख्या शासन को भेजी जाए।

पत्र नंबर तीन
22 मई वर्ष 2013 को शासन ने कृषि निदेशक सीएस मेहरा को लिखे पत्र में कहा कि मामले में कार्रवाई नहीं हुई है तो इसके कारण स्पष्ट करते हुए आपके स्तर से की गई कार्रवाई से अवगत कराया जाए। शासन को मामले में सुस्पष्ट आख्या भेजी जाए।
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मामले में शासन का पत्र निदेशालय को मिला है, लेकिन अभी मैंने इसे देखा नहीं है। पत्र देखकर ही बताया जाएगा कि क्या कार्रवाई होनी है।
- सीएस मेहरा, कृषि निदेशक

मामला कब का है और क्या स्थिति है इसे दिखवाया जाएगा।
- डा.रणवीर सिंह, प्रमुख सचिव कृषि

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